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अब गाड़ी को मॉडिफाई करना पड़ सकता है भारी, सरकार ला रही है नए नियम

नई दिल्ली (लोकसत्य) वैसे तो हर किसी को शौक़ होता है कि वो अपनी गाड़ी में सबकुछ अपनी मनमर्जी का रखें। लेकिन अगर अब आपने अपनी गाड़ी के कुछ कलपर्जों के साथ छेड़छाड़ की, तो यह आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने संशोधित मोटर वाहन अधिनियम में एक नई धारा जोड़ी है, जिसके तहत गाड़ी के कुछ पुर्जों के साथ छेड़छाड़ भारी पड़ सकती है।

सरकार ने सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गाड़ियों के कुछ कलपुर्जों जैसे स्पीड गवर्नर, जीपीएस एवं सीएनजी से छेड़छाड़ रोकने के लिए संशोधित मोटर वाहन अधिनियम में एक नई धारा 182 जोड़ी है। इस नई धारा के तहत इन पार्ट्स या कंपोनेंट्स के साथ छेड़छाड़ करने पर कंपनी और ग्राहक दोनों पर पांच हजार रुपये का जुर्माना और छह माह की कैद हो सकती है।

वहीं जीपीएस को मानकों के अनुरूप न पाये जाने पर कंपनी और ग्राहक दोनों को कानूनी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है। वहीं कुछ लोग गाड़ी में सीएनजी किट इंस्टॉल कराने के बाद उसके कुछ पार्ट्स जैसे फिलिंग वॉल में बदलाव कर देते हैं। सरकार नई धारा 182 को लेकर दिसंबर में सरकारी अधिसूचना जारी कर सकती है। धारा 182 में प्राइवेट और कमर्शियल दोनों प्रकार के वाहनों पर शिकंजा कसा जाएगा। वहीं अधिसूचना जारी होने के बाद यह कानून की शक्ल ले लेगा और उल्लंघन करने पर जुर्माना और सजा दोनों का प्रावधान होगा।

धारा 182 के तहत कमर्शियल वाहनों जैसे ट्रक, बस, टैंकर आदि की स्पीड हाईवे पर 80 किमी प्रति घंटा और नगर में यह 40 से 60 किमी प्रति घंटा से ज्यादा नहीं होगी। वहीं इनमें लगे स्पीड गवर्नर में छेड़छाड़ या फुल स्पीड से गाड़ी दौड़ाने पर पांच हजार रुपये का जुर्माना और छह माह की सजा का प्रावधान होगा।

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