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Delhi Covid19: दिल्ली में स्थिति नियंत्रण में, एक सप्ताह बाद बढ़े 3500 मरीज और 2500 हुए ठीक – केजरीवाल

नई दिल्ली (लोकसत्य)। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (arvind kejriwal) ने कहा कि लाकडाउन में ढील 9lockdown relaxation) देने के बाद दिल्ली में कोरोना के केस (positive  case increase) जरूर बढ़े हैं, लेकिन स्थिति नियंत्रण (under control) में है और घबराने की कोई बात नहीं है।

केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली सरकार ने आदेश जारी कर 117 प्राइवेट अस्पतालों(private hospitals) में 20 प्रतिशत बेड को कोविड के लिए रिजर्व कर दिया है। अब भी सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में कुल 4500 बेड खाली और उपलब्ध हैं। इसके अलावा जीटीबी अस्पताल में भी 1500 आक्सीजन बेड (oxygen bed) तैयार किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि लाकडाउन में ढील देने के बाद पिछले एक सप्ताह में करीब 3500 नए केस आए हैं और 2500 लोग ठीक होकर घर भी गए हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी अस्पताल किसी कोविड मरीज को उसके हाल पर नहीं छोड़ सकता है। यदि उसके पास कोविड बेड नहीं है, तो दूसरे अस्पताल में बेड दिलाने की उसकी जिम्मेदारी है।

केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली सरकार एक सिस्टम बना रही है, जिससे लोगों को आसानी से पता चल जाएगा कि कहां पर बेड उपलब्ध है।

केजरीवाल ने कहा कि बीते 17 मई को लाकडाउन में काफी ढील दी गई थी। इसे एक सप्ताह हो गया है। एक सप्ताह बाद यह कह सकता हूं कि स्थिति नियंत्रण में हैं और कोई भी घबराने वाली बात नहीं है। जब लाकडाउन में ढील दी गई थी। तब हमें यह उम्मीद थी कि केस में थोड़ी बढ़ोत्तरी होगी और थोड़ी बढ़ोत्तरी हुई भी है, लेकिन चिंता की कोई बात नहीं है। मुझे चिंता तब होगी, जब दो बातें होंगी। एक, अगर मौत का आंकड़ा बहुत तेजी बढ़ने लगेगा। मै बार-बार कहता रहा हूं कि कोरोना आज या कल में जाने वाला नहीं है। अभी कोरोना तो रहेगा। अगर कोरोना होता रहे और लोग ठीक होकर अपने घर जाते रहें, तो चिंता करने का कोई विषय नहीं है।

मौत के आंकड़े को हम कम से कम रख सकें, यह जरूरी है। दूसरा, जो केस हो रहे हैं, वह इतने गंभीर केस न हों कि हमारे अस्पतालों का पूरा सिस्टम बैठ जाए। अगर हमारे अस्पतालों में इतने मरीज आने लगे कि बेड, आक्सीजन और वेंटिलेटर नहीं मिलेंगे, तब चिंता का विषय होगा। कल तक दिल्ली में कुल 13418 केस पाजिटिव आए थे। इनमें से 6540 ठीक हो गए और 6617 लोग अभी बीमार हैं। जितने ठीक हुए हैं, लगभग उतने ही बीमार हैं, जबकि 261 लोगों की मौत हो गई है।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में अस्पतालों की स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कोरोना के सरकारी अस्पतालों में कुल 3829 बेड हैं। जिसमें 3164 बेड में आक्सीजन उपलब्ध है। यहां बार-बार आक्सीजन की बात इसलिए कही जा रही है, क्योंकि कोरोना की कोई दवा नहीं है। जिस मरीज को कोरोना हो जाता है, उसे आक्सीजन की कमी हो जाती है और आक्सीजन की कमी की वजह से उसकी सांसे तेज हो जाती है। इसलिए उसे आक्सीजन देनी पड़ जाती है। कोरोना के गंभीर मरीजों के लिए आक्सीजन की जरूरत पड़ती है। मामूली लक्षणों वालों को आक्सीजन देने की जरूरत नहीं पड़ती है। सरकारी अस्पतालों के 3829 बेड में से अभी तक केवल 1478 बेड ही इस्तेमाल किए जा रहे हैं। अभी भी सरकारी अस्पतालों के करीब 2500 बेड खाली हैं। सरकार के पास 250 वेंटिलेटर हैं। उनमें से केवल 11 वेंटिलेटर भी इस्तेमाल हो रहे हैं और करीब 240 वेंटिलेटर अभी खाली हैं। इसलिए अभी घबराने की कोई बात नहीं है। इसी तरह, निजी क्षेत्र में कुल 677 बेड हैं और उनमें से अभी 509 इस्तेमाल किए जा रहे हैं। अभी 168 बेड खाली हैं। इसीलिए कल सरकार ने आदेश जारी कर दिल्ली के 117 निजी अस्पतालों को अपने 20 प्रतिशत बेड कोरोना के लिए रिजर्व रखने का निर्देश दिया है। इससे प्राइवेट अस्पतालों के अंदर आज से करीब 2 हजार नए बेड उपलब्ध हो गए हैं। अभी तक प्राइवेट अस्पतालों में 677 बेड थे। अब 2000 और बेड उपलब्ध हो गए हैं। प्राइवेट अस्पतालों में 72 वेंटिलेटर हैं, जिसमें सिर्फ 15 इस्तेमाल हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में आ रहे अधिकतर कोरोना के केस मामूली लक्षणों वाले हैं। मरीजों में मामूली खांसी या बुखार है। कइयों में कोई लक्षण नहीं है। उन्हें पता ही नहीं चलता है कि उन्हें कोरोना हैं। जब जांच कराई तब उन्हें जानकारी हुई। उनमें कोरोना के कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। अधिकतर केस ऐसे आ रहे हैं और इन्हें अस्पतालों में भर्ती करने की जरूरत नहीं पड़ती है। ऐसे लोगों को हम होम आइसोलेशन में रखते हैं। दिल्ली सरकार की एक हेल्थकेयर की टीम उनसे प्रतिदिन बात करती है। उनके परिवार के लोगों से बात कर उन्हें सलाह देती रहती है। उन पर हम लोग नजर रखते रहते हैं कि कहीं कोरोना बढ़ गया, तो उन्हें अस्पताल में शिफ्ट कर देंगे। वर्तमान में दिल्ली के अंदर 3314 लोगों का घर पर ही इलाज चल रहा है। जैसा हमने बताया कि हमने 117 प्राइवेट अस्पतालों में अब 20 प्रतिशत बेड कोरोना के लिए होंगे। इसी तरह, हम जीटीबी अस्पताल को तैयार कर रहे हैं। जीटीबी अस्पताल के 1500 बेड होंगे। यह सभी आॅक्सीजन बेड होंगे। अब हमारे पास 1500 और बेड कोरोना के लिए तैयार हो जाएंगे। इस तरह सरकार में करीब 4500 बेड पूरी तरह से कोरोना के लिए हो जाएंगे। दिल्ली सरकार ने कल करीब 2 हजार और बेड को आॅक्सीजन बेड में बदलने का आदेश दिया है। एक तरह से हमारी पूरी तैयारी है कि अगर कोरोना बीमारी के गंभीर मरीजों में अचानक वृद्धि होती है, तो हम तैयार हैं।

केजरीवाल ने कहा कि दो दिन पहले पता चला है कि एक प्राइवेट अस्पताल में एक मरीज गया। उस मरीज को सांस की तकलीफ हो रही थी। दो दिन बाद अस्पताल ने उसकी जांच कराई और दो दिन बाद रिपोर्ट पाजिटिव आई। इसके बाद अस्पताल ने कहा कि आप कोविड-19 के मरीज हैं और हम आपका इलाज नहीं करेंगे। आप अपने लिए बेड ढूंढ लीजिए। ऐसे में मरीज अपना बेड कहां तलाशेगा और वह कहां जाएंगा। कोई भी अस्पताल इस तरह किसी भी मरीज को बाहर नहीं निकाल सकता है। हमने उस प्राइवेट अस्पताल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उससे पूछा गया कि आपका लाइसेंस क्यों न रद किया जाए। अगर किसी भी अस्पताल में कोई भी मरीज आता है और वह कोविड निकलता है, तो उस अस्पताल की जिम्मेदारी है कि वह अपनी एंबुलेंस में भेज कर किसी सरकारी या निजी अस्पताल में उसे कोविड बेड दिलवाएगा। अस्पताल किसी भी मरीज को इस तरह अपने हाल पर नहीं छोड़ सकते हैं।

केजरीवाल ने कहा कि कई बार लोगों को कोविड बेड तलाशने में दिक्कतें आती हैं। जैसा कि हमने बताया कि अभी सरकारी अस्पतालों में 2500 बेड खाली पड़े हैं और अब 2000 प्राइवेट अस्पतालों में भी बेड खाली मिलेंगे। इस तरह कुल 4500 बेड खाली हैं, लेकिन लोगों को पता ही नहीं चलता है कि किस अस्पताल में बेड खाली है। लोगों को यह पता नहीं चल पाता है कि वे कहां जाएं। इस समस्या के निदान के लिए दिल्ली सरकार एक सिस्टम बना रही है। अगले दो-तीन दिन के अंदर हम उस सिस्टम को सामने लाएंगे। जिसमें कोई भी कोविड का गंभीर मरीज है, उसको बेड चाहिए, तो उसे तुरंत पता चल जाएगा कि कहां जाना चाहिए। इसका हम पूरा सिस्टम बना रहे हैं

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