दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण ने एक बार फिर हालात बेहद गंभीर बना दिए हैं। हवा में घुला जहरीला धुआं अब लोगों के स्वास्थ्य पर असर डालने लगा है। कई क्षेत्रों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 500 के पार पहुंच गया है, जिससे वातावरण “Severe” श्रेणी में दर्ज किया गया है। प्रशासन ने आपातकालीन कदम उठाते हुए स्कूल बंद करने, निर्माण कार्य रोकने और सरकारी कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम लागू करने के निर्देश जारी किए हैं।
प्रदूषण का स्तर पहुंचा खतरनाक सीमा पर
दिल्ली के आनंद विहार, वजीरपुर, नरेला और रोहिणी जैसे इलाकों में AQI 480 से 520 के बीच रिकॉर्ड किया गया है। नोएडा और गाज़ियाबाद में भी स्थिति लगभग समान है। हवा में पार्टिकुलेट मैटर (PM 2.5 और PM 10) की मात्रा खतरनाक स्तर से कई गुना अधिक हो गई है। डॉक्टरों का कहना है कि यह हवा बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों के लिए बेहद हानिकारक है। सुबह के समय धुंध और धुआं मिलकर ‘स्मॉग शील्ड’ बना रहे हैं, जिससे दृश्यता घट रही है और सांस लेना मुश्किल हो गया है।
प्रशासन ने लागू किए आपातकालीन उपाय
ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत दिल्ली सरकार ने लेवल-4 यानी Severe Plus श्रेणी के उपाय लागू कर दिए हैं। इसके तहत स्कूल-कॉलेज बंद रहेंगे, निर्माण कार्यों पर रोक लगाई गई है और सरकारी कार्यालयों में 50% कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम लागू किया गया है। निजी कंपनियों को भी कर्मचारियों को ऑनलाइन कार्य करने की सलाह दी गई है। साथ ही, डीजल वाहनों पर निगरानी बढ़ा दी गई है और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।
NCR के अन्य शहरों की स्थिति
नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद और गाज़ियाबाद में भी प्रदूषण का स्तर “गंभीर” श्रेणी में बना हुआ है। नोएडा के सेक्टर-62 में AQI 505, जबकि गुरुग्राम में 470 के आसपास दर्ज हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वाहन, पराली जलाना और ठंडी हवाओं की कमी इस प्रदूषण के मुख्य कारण हैं। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों में राहत की कोई संभावना नहीं जताई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी और बचाव
AIIMS और सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यह हवा 20 सिगरेट रोज पीने के बराबर नुकसान पहुंचा रही है। लोगों को सुबह-शाम बाहर निकलने से बचने, N95 मास्क पहनने, घरों में एयर प्यूरिफायर का प्रयोग करने और हरी सब्जियों व विटामिन-C युक्त आहार लेने की सलाह दी गई है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह समय विशेष सावधानी का है।
प्रदूषण की स्थिति
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की स्थिति अब आपातकाल जैसी बन चुकी है। प्रशासन और नागरिकों दोनों को मिलकर इस संकट से निपटने के लिए जिम्मेदारी से कदम उठाने होंगे। फिलहाल राहत के आसार कम हैं, इसलिए सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।