
दिल्ली के धौला कुआं इलाके में 14 सितंबर को हुए BMW हादसे का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। इस एक्सीडेंट में वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के विभाग के उप सचिव नवजोत सिंह (52) की मौत हो गई थी, जबकि उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हैं और अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं। इस मामले में गिरफ्तार कार चालक गगनप्रीत की जमानत याचिका पर बुधवार, 17 सितंबर को कोर्ट में सुनवाई हुई, जहां दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर सवाल खड़े किए।
गगनप्रीत की तरफ से क्या कहा गया?
गगनप्रीत के वकील रमेश गुप्ता ने कोर्ट से जमानत देने की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज करने में 10 घंटे की देरी क्यों की। उनका तर्क था कि IPC की धारा 304 (BNS की धारा 105) इस केस में गलत तरीके से लगाई गई है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने जानबूझकर कड़ी धाराएं लगाई हैं ताकि आरोपी को फंसाया जा सके। वकील ने यह भी कहा कि पुलिस ने DTC बस को क्यों नहीं जब्त किया, जबकि हादसे में नवजोत सिंह की बाइक उसी से टकराई थी। साथ ही उन्होंने कोर्ट से मांग की कि घटनास्थल की सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखा जाए और मामले की निष्पक्ष जांच हो।
पुलिस का पक्ष
कोर्ट में पुलिस ने गगनप्रीत के कई सवालों का जवाब देते हुए खुद भी गंभीर आरोप लगाए। पुलिस का कहना था कि हादसे के बाद गगनप्रीत ने 5 घंटे तक पुलिस को कॉल क्यों नहीं किया। साथ ही उन्होंने घायल नवजोत सिंह और उनकी पत्नी को नजदीकी अस्पताल की बजाय 19 किलोमीटर दूर ले जाकर क्यों भर्ती कराया। पुलिस ने यह भी दावा किया कि जिस अस्पताल में दोनों को भर्ती कराया गया, वह गगनप्रीत के किसी परिचित का था। ऐसे में संदेह है कि सबूतों से छेड़छाड़ की कोशिश की गई हो। पुलिस ने यह भी सवाल किया कि गगनप्रीत खुद को गंभीर रूप से घायल बताती हैं, लेकिन घटनास्थल पर अपने बच्चों को कार से सुरक्षित निकाल रही थीं।
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अगली सुनवाई आज
कोर्ट ने गगनप्रीत की जमानत याचिका पर अभी फैसला नहीं दिया है। कोर्ट ने इस मामले में नोटिस जारी किया और सुनवाई गुरुवार, 18 सितंबर को तय की गई है। इस बीच पुलिस ने साफ कहा है कि हादसे में गगनप्रीत की भूमिका और इरादे की जांच बेहद जरूरी है।
क्या है पूरा मामला?
14 सितंबर को गगनप्रीत की BMW कार धौला कुआं इलाके में फुटपाथ से टकराने के बाद नवजोत सिंह की बाइक से भिड़ गई थी। इसके बाद उनकी बाइक DTC बस से टकराई। हादसे में नवजोत सिंह की मौके पर ही मौत हो गई जबकि उनकी पत्नी बुरी तरह घायल हो गईं। यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसमें एक सीनियर सरकारी अधिकारी की मौत हुई और पुलिस की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। अब पूरे देश की नजर 18 सितंबर की सुनवाई पर टिकी है।