पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत की संतुलित कूटनीति की गूंज अब वैश्विक स्तर पर सुनाई दे रही है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच तेहरान ने खुलकर भारत की भूमिका की सराहना की है। ईरानी नेताओं का मानना है कि भारत न सिर्फ तनाव कम करने में मदद कर सकता है, बल्कि बातचीत की दिशा भी तय कर सकता है, जिससे युद्धविराम की राह आसान हो सकती है।
भारत की कूटनीति पर ईरान का भरोसा
ईरान के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े प्रतिनिधि Abdul Majid Hakim Elahi ने भारत की विदेश नीति की खुलकर तारीफ की है। उनका कहना है कि भारत इस संघर्ष में एक बड़ी और सकारात्मक भूमिका निभाने की क्षमता रखता है। उन्होंने संकेत दिए कि भारत की निष्पक्ष छवि उसे मध्यस्थ के रूप में मजबूत बनाती है, जिससे दोनों पक्षों के बीच संवाद की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
तनाव के बीच बढ़ी भारत की अहमियत
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने का अल्टीमेटम दिए जाने के बीच भारत का नाम उभरना खास मायने रखता है। इस क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव और कूटनीतिक गतिरोध के बीच भारत को एक भरोसेमंद संवादकर्ता के तौर पर देखा जा रहा है।
विदेश मंत्रियों की बातचीत से संकेत
ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने भारत के विदेश मंत्री Subrahmanyam Jaishankar से फोन पर चर्चा की। इस दौरान क्षेत्रीय हालात, हमलों और संभावित समाधान पर बातचीत हुई। ईरान ने आरोप लगाया कि उसके औद्योगिक और नागरिक ढांचों को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता पर खतरा बढ़ रहा है।
होर्मुज संकट से बढ़ी वैश्विक चिंता
फारस और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के नियंत्रण और प्रतिबंधों ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। यह मार्ग वैश्विक तेल सप्लाई का प्रमुख रास्ता है। इसके बंद होने से ऊर्जा बाजार में अस्थिरता आई है और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने लगा है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह मुद्दा
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से पूरा करता है। ऐसे में इस क्षेत्र में अस्थिरता सीधे तौर पर भारत की ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है। भारत लगातार इस बात पर जोर दे रहा है कि तनाव जल्द खत्म हो और ऊर्जा आपूर्ति बिना बाधा जारी रहे। यही वजह है कि भारत की कूटनीति को इस समय निर्णायक माना जा रहा है।