प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक के उडुपी स्थित प्रसिद्ध श्री कृष्ण मठ में पहुंचकर पूजा-अर्चना की और लक्ष कंठ गीता पारायण कार्यक्रम को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि संतों की उपस्थिति में होना उनके लिए बेहद सौभाग्य की बात है. पीएम मोदी ने बताया कि गुजरात और उडुपी के बीच वर्षों पुराना आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रिश्ता है. उन्होंने कहा कि उडुपी वह जगह है, जहां जनसंघ और बाद में बीजेपी के सुशासन मॉडल की मजबूत नींव रखी गई. यही वजह है कि इस पवित्र भूमि पर आना हमेशा एक अद्भुत अनुभव देता है.
गीता के श्लोकों और आध्यात्मिक परंपरा का सम्मान
कार्यक्रम में बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि गीता का पाठ भारत की आध्यात्मिक शक्ति की पहचान है. शताब्दियों से गीता के श्लोक लोगों को धर्म, कर्तव्य और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते आए हैं. उन्होंने बताया कि उडुपी का योगदान केवल अध्यात्म तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक क्षेत्र में भी यहां से महत्वपूर्ण संकेत मिले हैं. उन्होंने विशेष रूप से राम मंदिर आंदोलन में उडुपी की बड़ी भूमिका को याद करते हुए कहा कि इस भूमि से चली धार्मिक चेतना ने देशभर में लोगों को एकजुट किया. साथ ही उन्होंने अयोध्या में हाल ही में हुए ध्वजारोहण और धर्मध्वजा स्थापना समारोह की भी चर्चा की.
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भगवान हरि का स्मरण कलयुग का बड़ा साधन
प्रधानमंत्री मोदी ने रामचरितमानस का उल्लेख करते हुए कहा कि कलयुग में भगवान हरि की महिमा का गान करना, उनके नाम का जाप करना और भक्ति में मन लगाना ही सबसे बड़ा साधन माना गया है. उन्होंने कहा कि इस युग में भक्ति का मार्ग सबसे सरल और सबसे शक्तिशाली माना जाता है. पीएम मोदी ने कहा कि भगवान के नाम का स्मरण व्यक्ति को न केवल जीवन में दिशा देता है, बल्कि मन को भी स्थिरता प्रदान करता है. उन्होंने कहा कि इसी आध्यात्मिक शक्ति के बल पर समाज आगे बढ़ता है और देश मजबूत होता है.
गीता का संदेश नीति और राष्ट्र निर्माण का मार्ग
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने भगवद गीता के महत्व को देश की नीतियों और दिशा से जोड़ते हुए कहा कि गीता केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन का मार्गदर्शन है. उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण ने युद्ध के मैदान में भी धर्म और न्याय के लिए खड़े होने का संदेश दिया था. गीता हमें सिखाती है कि जहां सच्चाई की स्थापना करनी हो, वहां अत्याचारियों का अंत भी आवश्यक हो जाता है. प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सीख आज भी उतनी ही प्रासंगिक है और देश के लिए मार्गदर्शन का काम करती है. उन्होंने कहा कि भारत की आध्यात्मिक परंपरा और गीता का संदेश ही राष्ट्र को एकजुट और मजबूत बनाता है.