हेल्थ

सिर्फ वैक्सीन ही है येलो फीवर का इलाज

नई दिल्ली (लोकसत्य)। दुनिया में ऐसी कई बीमारियां हैं, जिनका अभी तक इलाज तो नहीं खोजा जा गया, लेकिन राहत देनेवाली बात यह है कि इन बीमारियों से वैक्सीन या टीके बचा जा सकता है। ऐसी ही एक लाइलाज बीमारी है येलो फीवर, जो कि एक सीरियस फ्लू होता है। इसमें रोगी की जान जाने का खतरा बहुत अधिक होता है। यह बीमारी मच्छरों के कारण फैलती है, इसलिए जरूरी है कि मच्छरों से बचने के लिए हर संभव उपाय करना चाहिए। हालांकि येलो फीवर सबसे अधिक साउध अफ्रीका और साउथ अमेरिका के कुछ हिस्सों में अधिक प्रभावी है। लेकिन यह एक ऐसी बीमारी है, जो मच्छरों के संक्रमण से फैलती है। इसमें तेज बुखार और जॉइंडिस के साथ-साथ होते हैं। एक बार इस बीमारी की चपेट में आने के बाद इसका इलाज संभव नहीं हो पाता है। लेकिन इससे जीवनभर बचा जरूर जा सकता है। येलो फीवर वैक्सीन के जरिए। जी हां, इस खतरनाक बीमारी से बचानेवाली वैक्सीन करीब पिछले 80 साल से उपलब्ध है।

अधिकतर लोगों के लिए जीवन में एक बार ही येलो फीवर वैक्सीन का टीका लेने पर जिंदगी भर इस बीमारी से बचाव रहता है।  यह वैक्सीन वायरस की एक लाइव लेकिन वीक फॉर्म है, जिसे सिंगल शॉट में और एक गोली या टैबलेट के रूप में दिया जाता है। इस वैक्सीन को 9 महीने से अधिक उम्र के बच्चों को या इससे अधिक उम्र के लोगों को ही दी जाती है। बता दें कि  कुछ देशों में ऐंट्री से पहले येलो फीवर वैक्सीन लेनी होती है। इसके साथ ही वे लोग भी इस वैक्सीन का यूज करते हैं, जो येलो फीवर से प्रभावित एरिया में ट्रैवलिंग करते हैं। यानी साउथ अफ्रीका और साउथ अमेरिका के येलो फीवर प्रभावित एरिया में ट्रैवल करनेवाले।

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