लाइफस्टाइल

रिश्ते में प्यार और विश्वास होना बहुत जरूरी

अगर रिश्ते में प्यार और विश्वास ना हो तो वह ज्यादा समय तक टिका नहीं रह पाता। रिश्ते में दरार पड़ने पर कुछ महिलाएं तो पार्टनर से अलग हो जाती है लेकिन कुछ ना चाहते हुए भी तनाव भरे रिश्ते से बंधी रहती है। टूटते हुए रिश्ते को बचाने के लिए महिलाओं के ऊपर जाने-अनजाने एक प्रेशर बना रहता है। क्या आपने कभी सोचा है कि महिलाएं ऐसे रिश्ते में क्यों रहती हैं, जो उन्हें सिर्फ तकलीफ देता है? आज हम आपको ऐसी ही कुछ वजह बताएंगे, जिसके चलते महिलाएं ना चाहते हुए भी रिश्ते में ‘समझौता’ करने के लिए मजबूर हो जाती हैं।
खुद को मानती हैं कारण
मानसिक या शारीरिक उत्पीड़ना झेलने के बाद भी महिलाएं अपने रिश्ते को लेकर कन्फ्यूज रहती हैं। उन्हें लगता है कि इस हालात की जिम्मेदार वह खुद हैं, जिसकी वजह से वह अपना आत्मविश्वास खो देती हैं और उसी रिश्ते को ना चाहते हुए भी निभाती रहती हैं।
समाज का डर
लोग क्या सोचेंगे? लोग ताने मारेंगे? जैसे डर के चलते भी महिलाएं अपने टूटे हुए रिश्ते से बाहर नहीं निकल पाती। इतना ही नहीं, कई बार तो महिलाएं अपने फैमिली या फ्रेंड्स के साथ इस बारे में बात करने से भी डरती हैं।
पार्टनर के सुधरने की उम्मीद
यह तो भारतीय महिलाओं की सबसे बड़ी कमजोरी है कि वह आखिर तक पार्टनर के सुधरने की उम्मीद नहीं छोड़ती। भावनाओं में बहकर वो सालों तक अपने पार्टनर के साथ घुटन भरे रिश्ते को निभाती रहती हैं। हैरानी की बात तो यह है कि इसमें सिर्फ कम पढ़ी-लिखी ही नहीं बल्कि एजुकेटेड व कामकाजी महिलाएं भी शामिल हैं।
बच्चों का भविष्य
हमारे देश में सिंगल पेरेंट बनकर रहना काफी मुश्किल हैं, खासकर महिलाओं के लिए। अगर कोई महिलाएं बच्चे के साथ अकेली रहती हैं तो लोग उनके बारे में तरह-तरह की बातें करते हैं। सिर्फ महिला ही नहीं बल्कि स्कूल में बच्चे को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में बच्चे के भविष्य के बारे में सोचकर महिलाएं खुद घुट-घुटकर जीने को तैयार हो जाती हैं।
परिवार का दबाव
अगर कोई महिला हिम्मत करके रिश्ते से बाहर निकलने की कोशिश भी करें तो परिवार वाले उसका साथ नहीं देते। मां-बाप बेटी को समाज और बच्चों का वास्ता देकर उन्हें अपनी रिश्ता बचाने के लिए कहते हैं।
आर्थिक मजबूरी
ज्यादातर भारतीय महिलाएं अपने खर्चों के लिए भी पति पर निर्भर रहती हैं। ऐसे में पार्टनर को छोड़ने से पहले वह यही सोचती हैं कि खुद का खर्च कैसे उठाएंगी। इसी के चलते अब्यूजिव रिश्ते में रहना महिलाओं के लिए मजबूरी बन जाता है।

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