लाइफस्टाइल

होमवर्क कराते समय रहें बच्चे के आसपास

स्कूल से जब बच्चों को होमवर्क मिलता है तो बच्चों से ज्यादा बड़ों को इस बात की टेंशन होती है। उन्हें होमवर्क खत्म करवाना सिर्फ अपनी एक ड्यूटी लगती है, जिसे उन्हें किसी भी हाल में पूरी करनी होती है। वहीं दूसरी तरफ होमवर्क बच्चों को अपना सबसे बड़ा दुश्मन लगता है। वह होमवर्क न कर अपने दोस्तों के साथ खेलना पसंद करते है। बच्चों के लिए होमवर्क सबसे बड़ी मजबूरी होता है, जिसे वह बोझ समझ कर पूरा करते है लेकिन जब बच्चे इस तरह से पढ़ाई करते है तो उनके भविष्य के लिए बिल्कूल भी अच्छा नही होता है। इसलिए उन्हें होमवर्क हमेशा आसान व रोचक तरीके से करवानी चाहिए। इससे वह अपनी रोज की पढ़ाई करेगें।
सेट करें उनका टाइम टेबल
पेरेंट्स अपने बच्चों का टाइम टेबल सेट कर रुम में रखते है। पेरेंट्स बच्चों को कहें की वह खुद अपना टाइम टेबल सेट करें। उन्हें कहें उनका टाइम टेबल स्कूल से आने के बाद शुरु होगा। इसमें पढ़ाई के साथ उनका खाना, खेलना, आराम का समय भी शामिल होगा। इससे वह होमवर्क करने का अपना पसंदीदा समय तय करेंगे। इससे आप भी बिना दिक्कत उन्हें काम करवा पाएंगी। पढ़ाई का समय उनकी उम्र व काम के अनुसार तय करें।
बच्चे जब भी पढ़ने बैठे हमेशा उनके आस पास रहे। क्योंकि अक्सर पढ़ाई के समय बच्चों का मन खेलने व अन्य चीजों में चला जाता है। इसलिए उन्हें हमेशा स्टडी टेबल पर बैठ कर पढ़ने को कहे। इसके साथ ही हमेशा उनके आसपास रहे, जिससे आपकी उन पर पूरी निगरानी रहेगी। बच्चों के साथ आप भी अपनी कोई किताब लेकर बैठ जाएं, इससे बच्चे गंभीर होकर पढ़ेगें।
बच्चों से जुड़े कोर्स की हमेशा रखें जानकारी
बच्चों के सेलेब्स में क्या क्या है, उन्हें किस तरह की बुक्स लगी है। इसके बारे में हमेशा जानकारी रखे। समय समय पर शिक्षा के साथ अपना संपर्क रख कर बच्चों को गाइड कर सकते हैं। बच्चों की पीटीएम पर हमेशा जाएं। इसके साथ ही उनकी स्कूल डायरी को हमेशा चैक करें। इससे बच्चे को भी लगता है कि पेरेंट्स उनकी पढ़ाई पर पूरी नजर रख रहे हैं।
गैजेट्स से रखें दूर
होमवर्क के दौरान कोशिश करें की बच्चे टीवी, कम्पूटर, मोबाइल फोन जैसे गैजेट्स से दूर रहे। इससे उनका पूरा मन पढ़ाई पर ही लगा रहेगा। बच्चों के साथ- साथ यह बात आप पर भी लागू होती है। जब आप बच्चों के पास बैठे अपने फोन को दूर रखें।
बेसिक एजुकेशन की दें जानकारी
बच्चों की होमवर्क कभी भी एक ड्यूटी समझ कर न करवाए, उन्हें बेसिक एजुकेशन जरुर दें। उन्हें चीजें इस तरह समझाएं ताकि वह सारी उम्र उनके साथ रहे। इसके ही उन्हें रट्टा लगवाने की जगह चीजों को समझने के लिए प्रेरित करें। इससे वह परीक्षा में आने वाले प्रश्नों को आसानी से समझ पाएगें।
खुद करने को कहें प्रोजेक्ट
पेरेंट्स जब भी बच्चों के पास बैठते है तो बच्चे हर छोटी चीजों को पेरेंट्स से पूछते है। कई बार बच्चों को मिले अधिक होमवर्क को देखकर पेरेंट्स उनके साथ काम बांट लेते है।

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