लाइफस्टाइल

रेटिना से जुडी बीमारियां छीन सकती हैं आंखों की रोशनी

नई दिल्ली (लोकसत्य)। क्रोनिया (आंख के अगले हिस्से) से जुड़ी बीमारियों के बारे में तो लोग आमतौर पर काफी कुछ जानते हैं, लेकिन रेटिना (आंख के पिछले हिस्से) से जुड़ी बीमारियों के बारे में लोगों को आसानी से पता नहीं चल पाता। विशेषज्ञों का कहना है कि अंधापन होने के कारणों की वजहों में आंखों से जुड़ी अन्य बीमारियों की तुलना में रेटिनल बीमारियां ज्यादा परेशानी का कारण बनती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, विभिन्न रेटिनल विकारों में उम्र से जुड़ी मैक्यूलर डिजनरेशन (एएमडी) और डायबिटिक मैक्यूलर इडिमा (डीएमई) दो ऐसी बीमारियां हैं, जिससे हमेशा के लिए आंखों की रोशनी खोने का डर रहता है। एएमडी और डीएमई को आसानी से मैनेज किया जा सकता है, अगर समय पर बीमारी की पहचान हो जाए।  विशेषज्ञों का कहना है कि रेटिनल बीमारियों जैसे कि एएमडी में धुंधला या विकृत या देखते समय आंखों में गहरे रंग के धब्बे दिखना, सीधी दिखने वाली रेखाएं लहराती या तिरछी दिखना लक्षण है। आमतौर पर रेटिनल बीमारियों की पहचान नहीं हो पाती क्योंकि इसके लक्षणों से दर्द नहीं होता और एक आंख दूसरी खराब आंख की क्षतिपूर्ति करती है। जब एक आंख की रोशनी बहुत ज्यादा चली जाती है और एक आंख बंद करके देखते हैं तो पता चलता है। इसलिए इसके लक्षणों को समझना जरूरी है और इसकी पहचान कर विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए ताकि आंखों की रोशनी को बचाया जा सके।

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