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डिप्रेशन की वजह से कड़वे और मीठे का फर्क नहीं कर पाती जीभ

नई दिल्ली (लोकसत्य)।  खट्टा, मीठा, तीखा या नमकीन का स्वाद तभी पता चलता है, जब जुबान का स्वाद ठीक होता हैं। लेकिन हर बार जुबान के खराब स्वाद के पीछे केवल स्वाद गरंटी जिम्मेदार नहीं हो सकती, ब‎ल्कि इसके पीछे डिप्रेशन भी एक कारण हो सकता है। इसका लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज के जीरियाटिक ऐंड मेंटल हेल्थ विभाग द्वारा की गई एक रिसर्च को प्रकाशित किया है, जिसमें यह बात सामने आई है। बता दें ‎कि केजीएमयू ने 200 मरीजों में 40 पर इस रिसर्च को किया है। इस दौरान रिसर्चर्स ने मरीजों को दो भागों में बांटा- 60 से कम उम्र के मरीज और दूसरा 60 से 80 साल तक के मरीज।  ‎जिसमें यह बात सामने आई कि अगर कोई व्यक्ति डिप्रेशन से जूझ रहा है, तो उसे कड़वा या मीठा ठीक से समझ नहीं आता है, लेकिन मरीजों ने नमकीन स्वाद को आसानी से पहचान लिया। बता दें ‎कि रिसर्च को लीड करने वाले प्रो. श्रीकांत श्रीवास्तव ने जानकारी दी कि जिन मरीजों में ये समस्या पायी गयी वो डिप्रेशन से पहले बिल्कुल सामान्य थे। उनकी स्वाद ग्रंथियां ठीक तरीके से काम कर रही थीं। रिसर्चर्स का यह भी मानना है कि जो लोग ठीक से स्वाद को न समझ पाने की शिकायत करते हैं वो किसी न किसी मानसिक दबाव से जूझ रहे होते हैं या डिप्रेशन का शिकार हो सकते हैं। उन्होंने ये भी बताया कि डिप्रेशन के पहले फेज में पता चला कि लोगों को स्वाद बदला हुआ महसूस हुआ है। वहीं दूसरे फेज में रिसर्चर्स ने यह पता लगाने की कोशिश की गई कि कहीं दवाओं के सेवन के कारण लोगों की जुबान का स्वाद नहीं बिगड़ रहा है, लेकिन गहन रूप से पड़ताल करने के बाद पता चला कि दवाओं के सेवन की वजह से स्वाद ग्रंथि या जुबान के स्वाद में कोई परिवर्तन नहीं आया था।

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