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टीवी कलाकारों ने साझा किया कि कैसे उनकी मां ने दिया उनके जीवन को आकार

मई के दूसरे रविवार को दुनिया भर में मदर्स डे मनाया जाता है। कल यानी 10 मई को इस माह का दूसरा रविवार है और कल भारत सहित विश्वभर में मदर्स डे मनाया जाएगा। मां को सम्मान देने वाले इस दिन को हर कोई अपने अंदाज में सेलिब्रेट करता है। इसी बीच छोटे पर्दे के कलाकारों ने भी अपनी-अपनी मां के नाम एक संदेश दिया और बताया कि कैसे उनके जीवन को उनकी मां ने एक नया आकार दिया है।

अलिफ लैला से चेतन हंसराज
आज मैं जो कुछ भी हूं अपनी मां की वजह से हूं। जब मैं 5 साल का था तो मैंने उनको कहा कि मैं मॉडलिंग करना चाहता हूं। उनके प्रयासों के कारण मैंने एक बाल अभिनेता के रूप में 250 से अधिक विज्ञापन किए। मेरी माँ की वजह से अभिनय में मेरी दिलचस्पी बढ़ी और मैं उनका बहुत ऋणी हूँ। उन्होंने हमेशा मेरा साथ दिया है। आज तक जब भी मैं कोई शो या फिल्म करता हूं तो वह मुझे उसकी ईमानदार प्रतिक्रिया देता है। मैं उनसे हर चीज के लिए प्यार करता हूं जो उन्होंने मुझे बिना शर्त के दि है |

अलिफ लैला से शाइनी दोशी
मेरी मां ने मुझे आत्म प्रेम और एक महिला होने की शक्ति के महत्व को सिखाया है। यह पहला सबक है जो मैंने उनसे सीखा है। आज मैं जो व्यक्ति हूं, उसे बनाने के लिए मैं उनकी आभारी हूं। उसने मुझे चीजों का महत्व और मूल्य सिखाया है। सबसे महत्वपूर्ण कौशल जो मैंने अपनी माँ से सीखा है, वह है खाना बनाना। इन लॉकडाउन दिनों में अब यह मेरी मदद कर रहा है| दंगल टीवी के शो अलिफ लैला से शाइनी दोशी ने ये भी कहा कि मैं सभी माताओं को शुभकामना देना चाहती हूं। दुनिया में किसी भी चीज की तुलना उस तरह के प्यार से नहीं की जा सकती जो एक माँ अपने बच्चों पर करती है |

आदि पराशक्ति से रति पांडे
मेरा मानना है कि सभी माताएँ अपने आप में एक प्रेरणा हैं। उन्होंने हम सभी को बिना शर्त प्यार और जीवन की यात्रा के माध्यम से कई अन्य सबक सिखाए हैं! मेरी माँ की बात करें तो, वह पेशेवर और व्यक्तिगत रूप से मेरी आदर्श और प्रेरणा रही हैं। उसने मुझे सिखाया है कि जीवन की हर स्थिति और क्षण में खुशी कैसे पाएं, चाहे वह अच्छा हो या बुरा, मुश्किल हो या और भी बुरा। दंगल टीवी के शो आदि पराशक्ति के रति पांडे ने एक किस्सा बताते हुए कहा कि वास्तव में, वह हमेशा मेरी सबसे अच्छी दोस्त रही है और मेरी ताकत का स्तंभ है। वह मुझे बोली जाने वाली बातों से परे समझती है ।यहां तक कि जब मैं अपने जीवन के क्षणों को छूपती हूं, तब भी वह सही चीजों को कहने और मुझे अपनी समस्याओं से निपटने में मदद करने का एक तरीका ढूँढने में भी मदद करती है।

देवी- आदि पराशक्ति से तरुण खन्ना
मेरी माँ मेरी पहली गुरु थी, मेरी पहली दोस्त। उन्होंने मुझे सबका सम्मान करना और हमेशा दयालु रहने की शिक्षा दी। और उन्होंने मुझे जो सबसे बड़ा सबक सिखाया, वह यह था कि सबसे अच्छा धर्म मानवता है। वह सबसे विनम्र और ईमानदार व्यक्ति थीं जिनसे मैं कभी मिली हूं और आज मैं जो भी हूं, मैं उन्हिके कारान हूं।।

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