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जानें, हिन्दू धर्म में Tulsi Mala का क्या है महत्व

नई दिल्ली (लोकसत्य)। हम रोज सुबह पूजा कर के तुलसी को जल अर्पण करते है जो बहुत कल्याणकारी होता है तुलसी का हिन्दू संस्कृति में बहुत महत्व है। हिन्दू धर्म में तुलसी को माता कहा जाता है। और देवी का स्वरूप माना जाता है। तुलसी के पत्तों का नियमित सेवन करने से कई बीमारियों से दूर रहा जा सकता है। तुलसी के पत्तों के साथ-साथ तुलसी के तने से अर्थात तुलसी की टहनियों से माला भी तैयार की जाती है। तुलसी कंठी माला की कुछ जानकारी कृष्ण प्रिया तुलसी जीव का परम कल्याण करने वाली है। जिस मनुष्य के कंठ में तुलसी होती है, वह यम की त्रास नहीं पाते।

ऐसे जीव गोलक को प्राप्त होते हैं। जन्म मरण के चक्कर से छूट जाते हैं और अंतत: नित्य लीला को प्राप्त करते हैं। मनुष्य जब मृत्यु शैया पर होता है तो अंत समय में उसके मुख में भी तुलसी दल और गंगाजल डाला जाता है। इसी प्रकार जब कंठ में तुलसी की माला धारण की हुई होती है तो वह परम कल्याणकारी होती है।वैज्ञानिक रूप से देखा जाए तो तुलसी की लकड़ी में एक खास प्रकार का द्रव्य पाया जाता है ,मानसिक तनाव में भी राहत दिलाती है,और रक्त संचार बहतर होता है।

जो मनुष्य कृष्ण को अपना सर्वस्व मानता है, वह तुलसी कंठी अवश्य धारण करता है। जिस तन पर तुलसी माला होती है वह भगवान का भोग हो जाता है। जिस प्रकार सौभाग्यवती नारी का परम शृंगार है कुमकुम, मंगलसूत्र इत्यादि। यदि नारी की मांग में कुमकुम व गले में मंगलसूत्र होता है, तो वह उसके सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है, उसी प्रकार माथे पर तिलक और कंठ में तुलसी कंठी माला, वैष्णवो के सौभाग्य, समर्पण व सान्निध्य के प्रतीक हैं।भगवान उसे सहजता से स्वीकार करते हैं।

तुलसी माला धारण करने के कुछ नियम:

● तुलसी माला धारण करने वाले मनुष्य को सात्विक भोजन करना चाहिए अर्थात प्याज, लहसुन, मांसाहार का त्याग करना चाहिए।
● किसी भी उम्र में स्त्री या पुरुष चाहे आपकी दीक्षा हुई हो या नहीं आप तुलसी माला धारण क्र सकते हैं।
● सबसे जरूरी नियम, तुलसी माला धारक को अधिक से अधिक प्रभु का नाम जाप करना चाहिए
● इसे अपनी देह से अलग नहीं करना चाहिए चाहे परिवार में जन्म अथवा मृत्यु कुछ भी हुआ हो।

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