लाइफस्टाइल

अधिकारों के प्रति जागरुक हुई महिलाएं

लंदन (लोकसत्य)। पूरी दुनिया में महिलाएं अपने अधिकारों और आजादी को लेकर जागरूक हो रही हैं। दक्षिण कोरिया और जापान में महिलाओं ने अपनी आजादी और अधिकार को लेकर अनोखा अभियान चलाया है। यहां महिलाओं के ऐसे कई समूह हैं, जो शादी और मां बनने से परहेज कर रहे हैं। दोनों देश दुनिया के सबसे कम जन्म दर वाले देशों में शामिल हैं। जापान सबसे कम जन्मदर वाले देशों में पहले और द कोरिया आठवें पायदान पर है। कोरिया में तो महिलाएं बकायदा ‘हैशटेग नो मैरिज वुमन’ अभियान चला रही हैं। इसके जरिए महिलाओं को 4 चीजों से बचने की सलाह दी जा रही है। इसमें नो डेटिंग, नो सेक्स, नो मैरिज और नो चिल्ड्रन शामिल हैं।

महिलाओं के शादी न करने की वजह से यहां कई मैरिज हॉल बंद हो गए हैं। सरकार इस संकट से इतनी चिंतित है कि युवाओं को शादी के लिए प्रोत्साहित कर रही है और पैसा दे रही है। द कोरिया में हालत इतने बिगड़ गए हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक दशक पहले लगभग 47 फीसदी महिलाएं मानती थी कि शादी जरूरी है, लेकिन पिछले साल यह आंकड़ा 22.4 फीसदी तक गिर गया है।

सरकार ने शादी करने और पिता बनने के लिए प्रोत्साहन योजना शुरु की है। कई प्रांतों में सरकार महिलाओं से उनकी लंबाई, वजन, फोटो और बायोडाटा मांग रही है। दक्षिण कोरिया में जनसंख्या का घटना श्रम शक्ति के लिए खतरा बन रहा है। सियोल में 20 फीसदी से ज्यादा मैरिज हॉल बंद हो गए हैं। सियोल के कई स्कूलों में पढ़ने के लिए बच्चों की भारी कमी होने की वजह से स्कूल बंद करने पड़े हैं। सियोल की बोनी ली ने कहा मैं अपनी खुशी खुद तय करूंगी। मैं एक सीधी-सादी महिला हूं, जिसे अब पुरुषों के साथ संबंध बनाने में कोई दिलचस्पी नहीं है। ऐसा करने वाली मैं अकेली महिला नहीं हूं। दक्षिण कोरिया में ऐसी महिलाओं की संख्या बढ़ती जा रही है, जो कठोर पितृसत्तात्मक मानदंडों को खारिज कर रही हैं। जापान की आबादी तेजी से बुढ़ापे की तरफ बढ़ रही है।

इस वजह से समाज और अर्थव्यवस्था दोनों पर असर पड़ रहा है। कोरिया की ही तरह जापान के युवा भी शादी से इनकार कर रहे हैं। कम बच्चे और कम युवा आबादी देश के लिए संकट बन गई है। यह वजह है कि यहां महिलाओं पर दूसरा बच्चा पैदा करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है, ताकि युवा जनसंख्या बढ़ाई जा सके। साथ ही देश की जन्म दर भी बढ़ सके।

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