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नियम से की गई Shaligram की पूजा होती है फलदायक, जानें पूजन का विधि

नई दिल्ली (लोकसत्य)। श्रीमदभागवत के अनुसार अगर रोज Shaligram जी का पूजन किया जाए तो जीवन और भाग्य में बदलाव जाता है। लेकिन इनकी पूजा के बहुत नियम होते है जिन्हे अपन्ना बहुत जरूरी होता है। बहुत से हिन्दुओं के घरों में शालिग्राम होता है। यदि आप शालिग्राम जी की विधि पूर्वक पूजा करते हैं तो किसी भी प्रकार की कोई व्याधि नहीं होती और आपको किसी भी प्रकार की ग्रह बाधा परेशान नहीं करती। शालिग्राम को घर में रखने से न केवल और सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। बल्कि शालिग्राम को घर में रखने से सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा भी समाप्त होती है।

यह शिवलिंग से मिलता-झूलता एक पत्थर होता है जो कि नेपाल के मुक्तिनाथ, काली गंडकी नदी के तट पर ही पाया जाता है। इसके अलावा शालिग्राम को शंख और शिवलिंग के साथ भी रखा जाता है। शिवलिंग शिवजी तो शालिग्राम भगवान विष्णु का विग्रह रूप है। शिवलिंग और तुलसी के पौधे के पास शालिग्राम का रहना आवश्यक होता है। शालिग्राम जी को भगवान विष्णु का ही प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा शालिग्राम को शंख और शिवलिंग के साथ भी रखा जाता है। इसके अलावा शालिग्राम को शंख और शिवलिंग के साथ भी रखा जाता है। इसके अलावा शालिग्राम को शंख और शिवलिंग के साथ भी रखा जाता है।

यदि आप घर में शालिग्राम जी स्थापित करते हैं तो आपको घर में वैष्णव नियमों का पालन करना चाहिए।शालिग्राम की पूजा करने से पहले साधक का शुद्ध होना आवश्यक है। इसलिए स्नान करने के बाद साफ वस्त्र अवश्य धारण करें। रोज शालिग्राम से पूजा करने से पहले उसे पंचामृत से स्नान अवश्य कराएं। जिसमें दूध, दही,शहद, शक्कर और घी मिलाकर उसमें दो पत्ते तुलसी के अवश्य डालें।इनकी पूजा सुबह व् संध्या के दोनों बेला में करना जरूरी होती है। अगर इनकी नियम अनुसार पूजा न हो तो इससे आपको बहुत हानि हो सकती है।

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