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कांग्रेस के आधुनिक चाणक्य थे Ahmad Patel, जानिए कैसा रहा अहमद का राजनीतिक सफर

नई दिल्ली (लोकसत्य)। गुजरात में तालुक स्तर से राजनीति शुरू कर Ahmad Patel कांग्रेस के लिए चाणक्य ही नहीं बने अपितु संकटमोचक बनकर पार्टी को मजबूत बनाने में अपना जीवन समर्पित कर दिया। कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक सलाहकार रहे पटेल केंद्र में मंत्री बनने के आमंत्रण को ठुकराते हुए कांग्रेस संगठन की मजबूती के लिए आजीवन काम करते रहे।

कांग्रेस के चाणक्य कहे जाने वाले अहमद पटेल ने कई मौकों पर पार्टी को संकट से उबारने का काम किया। पार्टी में महत्वपूर्ण पदों पर काम करते हुए वह हमेशा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के विश्वास पात्र बने रहे। वह वर्तमान में कांग्रेस के कोषाध्यष थे और यह जिम्मेदारी उन्हें दूसरी बार मिली थी।

आपातकाल के समय जब पूरा देश पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ था और 1977 के आम चुनाव में जब लहर गांधी के विरुद्ध चल रही थी, उस समय पटेल ने महज 26 साल की उम्र में लोकसभा का सदस्य बनकर राजनीति में अपनी अलग पहचान स्थापित कर ली थी। उसके बाद वह कभी रुके नहीं और हमेशा कांग्रेस के संकट मोचक् के रूप में अपनी सेवाएं देते रहे।

गुजरात के भरूच जिले के अंकलेश्वर में 1949 में जन्मे अहमद पटेल प्रदेश युवक कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। वह तीन बार लोकसभा और चार बार राज्य सभा के सदस्य रहे। उन्होंने पहला चुनाव 1977 में भरूच लोकसभा सीट से लड़े और पूरे देश मे कांग्रेस के खिलाफ लहर के बावजूद 62 हज़ार 879 वोटों से चुनाव जीते थे। वह 1980 में भी इसी सीट से लड़े और 82 हज़ार 844 वोटों से जीते। जीत के अंतर का यह सिलसिला आगे बढ़ते हुए उन्होंने 1984 में तीसरी बार लोकसभा चुनाव लड़ा और एक लाख 23 हज़ार 69 वोटों से जीत दर्ज की।

पटेल 1993 में राज्यसभा के लिए चुने गए और लगातार चार बार राज्यसभा सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं देते रहे। जनवरी से सितंबर 1985 तक उन्होंने प्रधानमंत्री के संसदीय सचिव के रूप में कार्य किया और फिर जनवरी 1986 तक अखिल कांग्रेस महासचिव के रूप में कार्य किया।

जनवरी 1986 से अक्टूबर 1988 तक वह गुजरात प्रदेश के अध्यक्ष रहे और फिर अप्रैल 1992 में कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य बने। वह मई 1992 से अक्टूबर 1996 तक कांग्रेस महासचिव रहे।

पटेल 2001 से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार नियुक्त हुए। पटेल पर जुलाई 2008 में कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार के बहुमत हासिल करने के समय उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा था। इस मामले की जांच की गयी तो सबूत के अभाव में उन्हें क्लीन चिट दे दी गई थी। सीताराम केसरी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद अक्टूबर 1996 से जुलाई 2000 तक पटेल कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रहे।

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