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भारत और नेपाल बातचीत के जरिए जल्द करें आपसी मतभेदों को दूर: Experts

नई दिल्ली (लोकसत्य)। भारत और नेपाल के बीच रोटी-बेटी के संबंधों का हवाला देते हुए Experts ने दोनों देशों से सीमा विवाद सहित अन्य मतभेदों को बातचीत के जरिये जल्द दूर कर संबंधों में सकारात्मक बदलाव लाने को कहा है। दोनों देशों के Experts ने ‘नेपाल-भारत सामरिक समरूपता: साझेदारी को प्रगाढ बनाना’ विषय पर एक सामाजिक संस्थान द्वारा यहां आयोजित एक वेबिनार में ये विचार व्यक्त किये।

सेवानिवृत लेफ्टिनेंट जनरल शोकिन चौहान ने कहा कि भारत और नेपाल का इतिहास, भूगोल, संस्कृति और पानी एक समान है। सैन्य कूटनीति को द्विपक्षीय संबंधों की रीढ करार देते हुए उन्होंने कहा कि 1950 में कम्युनिस्ट चीन ने जब नेपाल की संप्रभुता पर निशाना साधते हुए उससे ‘मेनलैंड’में शामिल होने के लिए कहा तो भारतीय सेना ने नेपाली सेना को पुनगर्ठित करने में मदद की थी।

नेपाल दूतावास में रक्षा अताची रह चुके लेफ्टिनेंट जनरल चौहान ने कहा ,“आप भले ही किसी भी रूप में हैं दोनों देशों की सेनाओं के बीच एक ही भावना है। नेपाल में एक लाख 28 हजार सैन्य पेंशनधारी हैं जो देश की आबादी का बड़ा हिस्सा है। ” उन्होंने कहा कि सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की आगामी नेपाल यात्रा का सभी को उत्सुकता से इंतजार है क्योंकि इससे दोनों देशों के बीच सैन्य संबंधों पर ध्यान केन्द्रीत होता है।

दोनों देशों की ‘समान नियति’ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि नेपाल को भारत की सुरक्षा चिंताओं के प्रति संवेदनशील होने की जरूरत है और इन चिंताओं का समाधान किये जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर यह कहना चाहिए , “ हम दोनों देशों को साथ रहने की जरूरत है। ”

नेपाल सरकार में मंत्री रह चुके और मौजूदा संसद के सदस्य डा मिनेन्द्र रिजल ने कहा कि भले ही नेपाल भारत और चीन दोनों से छोटा देश है लेकिन उसे अपने राजनयिक निर्णयों के परिणामों की समझ है। उन्होंने माना कि भारत और नेपाल के बीच विशेष, गहरे और अथाह संबंध हैं जो बहुत कम देशों के बीच देखने को मिलेंगे।

भारत के आर्थिक विकास के बारे में नेपाल के दृष्टिकोण को रखते हुए उन्होंने कहा, “ भारत की आबादी नेपाल से 40 गुना अधिक है और इसकी अर्थव्यवस्था नेपाल की अर्थव्यवस्था से सौ गुना बड़ी है। आने वाले 20 से 25 वर्षों में भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। हमें इन तथ्यों का पता है। ”

उन्होंने कहा कि भविष्य में नेपाल निश्चित रूप से भारत के लिए महत्वपूर्ण साझीदार बन सकता है। दोनों देशों द्वारा जल संसाधान के प्रबंधन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। भारत नेपाल में पनबिजली से बहुत अधिक लाभ उठा सकता है। नेपाल की मदद से उत्तर भारत में पानी की कमी से निपटा जा सकता है।

लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी के बारे में उन्होंने कहा कि हमें अपने दावों के बारे में अच्छी तरह से पता है और पिछले 20 से 25 वर्षों में इसकी पहचान की गयी है। दोनों देश मिलकर बात करेंगे और मामले की मेरिट पर निर्णय करेंगे। इस पहलू के चलते हमें द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित नहीं होने देना चाहिए।

नेपाली सेना के सेवा निवृत मेजर जनरल बिनोज बसनयत ने कहा कि रॉ प्रमुख और सेना प्रमुख की नेपाल यात्रा दोनों देशों के संबंधों के हिसाब से महत्वपूर्ण हैं। ये यात्रा दोनों देशों के बीच सैन्य संंबंधों, सैन्य कूटनीति की जरूरत, भारत की सुरक्षा चिंताओं और चीन के बढते प्रभाव जैसे मुद्दों के परिप्रेक्ष्य में महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि वैश्विक राजनीति हिन्द प्रशांत क्षेत्र पर केन्द्रीत हो रही है और चीन तथा उसके इर्द गिर्द का क्षेत्र इसके केन्द्र में है। चीन की राजनीतिक महत्वकांक्षा इसे सामरिक तथा ट्रांजिट जरूरतों के लिए पडोसी देशों पर अधिक निर्भर बना रही है। नेपाल भी इसका अपवाद नहीं है। भारत क्षेत्रीय और वैश्विक ताकताें के लिए और महत्वपूर्ण बन गया है।

पूर्व सैन्य अधिकारी ने कहा कि कोई भी देश अपने भूगोल और पडोस के साथ सांस्कृतिक एकता को नहीं बदल सकता। उन्होंने कहा, “हम पुराने मित्र हैं लेकिन नयी स्थिति में हैं। हमें एकसाथ बैठने की जरूरत है जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि आने वाले समय में दोनों देशों के लोगों के बीच अच्छे संबंध रहें।”

एकीकृत राष्ट्रीय सुरक्षा फोरम के महासचिव शेषाद्री चारी ने 1950 की द्विपक्षीय संधि पर फिर से विचार करने को कहा। उन्होंने सुझाव दिया कि दोनों देशों को यह सोचना होगा कि इसमें बदलाव की जरूरत है या इसकी जगह नयी संधि की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया के सीमा विवाद ब्रिटेन द्वारा विरासत में दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि एक बंद कमरे में 100 वर्ष पहले किये गये निर्णय आज हमें बहुत प्रभावित कर रहे हैं। हम उस अतीत को अभी भी क्यों सिर पर लिये घूम रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जब सीमा को लेकर भारत और चीन के बीच तनाव है तो उसी समय नेपाल का सीमा के बारे में सवाल उठाना भारत के लिए सुरक्षा का मामला बन जाता है। उन्होंने आग्रह किया कि नेपाल के राजनीतिक नेतृत्व को चीन के संदर्भ में भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखना चाहिए।

चारी ने कहा कि हम नेपाल में राजनीतिक और आर्थिक स्वतंत्रता तथा संप्रभुता चाहते हैं। हम किसी कीमत पर नेपाल की हैसियत में कमी नहीं होने देना चाहते भले ही कोई देश कितनी भी कोशिश करे।

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