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आईटीबीपी के जवानाें ने चीनी सैनिकों का भ्रम तोड़ा: Kishan Reddy

नई दिल्ली (लोकसत्य)। केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री Kishan Reddy ने प्रतिकूल परिस्थितियों में सीमाओं की रक्षा में मुस्तैदी से डटी भारत तिब्बत सीमा पुलिस की सराहना करते हुए आज चीन का नाम लिये बिना कहा कि बल के जवानाें ने दुनिया की सबसे ताकतवर सेनाओं में से एक होने का दम भरने वाली सेना का भ्रम तोड़ दिया है।

रेड्डी ने भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के 58 वर्ष पूरे होने पर बल के स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए सीमाओं की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले बल के हिमवीरों को श्रद्धांजलि अर्पित की। हाल के महीनों में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर बल के जवानों के साहसिक कारनामों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “दुनिया की कुछ सेनाओं को अपनी ताकत पर भम्र था कि वे सबसे ताकतवर सेनाएं है, लेकिन पिछले कुछ महीनों में आईटीबीपी ने उनका भ्रम तोड़ दिया। उनके शौर्य और साहस पर देश को गर्व है।”

उन्होंने कहा कि बल के जवान बेहद अधिक प्रतिकूल परिस्थितियों में सीमाओं पर बहादुरी के साथ डटे हुए हैं और अपनी जान को जोखिम में डालने से पीछे नहीं हटते। सरकार की ओर से वह उनके परिजनों को विश्वास दिलाते हैं कि पूरा देश तथा सरकार उनके साथ खड़ी है। उन्होंने कहा भारत की संस्कृति यह संदेश देती है कि पूरी दुनिया एक परिवार है लेकिन हमें भारतीय संस्कृति और अपने पूर्वजों पर इस बात के लिए भी गर्व होना चाहिए कि उन्होंने हमें शास्त्र-विद्या के साथ साथ शस्त्रपूजा करना भी सिखाया। उन्होंने कहा पता नहीं चलता कि दुश्मन किसी रूप में और कहां से आ जाये इसलिए हमें हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए।

रेड्डी ने कहा कि आईटीबीपी देश की सुरक्षा के साथ साथ आर्थिक विकास में भी योगदान दे रही है। देश के पडोस में शत्रु हैं जो आर्थिक विकास में समय समय पर बाधा पहुंचाने की कोशिश करते हैं लेकिन बल के जवान उनकी कोशिशों को विफल कर यह सुनिश्चित करते हैं कि देश निर्बाध रूप से आर्थिक विकास के मार्ग पर अग्रसर रहे।

उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में आतंकवाद से लडाई हो या छत्तीसगढ़ में लेफ्ट विंग का संघर्ष सभी जगह आइटीबीपी ने उत्कृष्ट योगदान दिया है। सरकार आईटीबीपी को पूर्ण रूप से सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और इसे अधिक सक्षम तथा आधुनिक बनाने के लिए उसने कई कदम उठाए हैं। गृह मंत्रालय ने आईटीबीपी को 47 बॉर्डर आउटपोस्ट बनाने की मंजूरी दे दी है। जवानों को आवश्‍यक यूनीफार्म और मॉनिटरिंग इक्विपमेंट दिए गए है। एक वर्ष में 28 प्रकार के नए वाहनों की व्यवस्था की गई है। आईटीबीपी के लिए 7,223 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया गया है। साथ ही प्रबंधन के लिए 15 करोड़ से अधिक राशि मंजूर की गई है। रेड्डी ने आईटीबीपी कर्मियों को छह राष्‍ट्रपति पुलिस पदक और सराहनीय सेवाओं के लिए 23 पुलिस पदक प्रदान किए।

इससे पहले आइटीबीपी के महानिदेशक सुरजीत सिंह देशवाल ने कहा कि आईटीबीपी में आधुनिकीकरण के लिए लगातार कोशिश की जा रही है जिसमें जवानों को आधुनिक गाड़ियां, जैकेट, हेलमेट आदि की खरीद शामिल है। इसके साथ ही राइफल को भी अपग्रेड किया गया है, सीमा पर बेहतर संचार के लिए उपकरण भी लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें गर्व है कि कोविड-19 की विषम परिस्थितियों में आईटीबीपी को देश की सेवा करने का मौका मिला जिसमें स्वास्थ्य सेवाएं तथा अन्य सेवाएं निशुल्क प्रदान की गईं।

आईटीबीपी की स्‍थापना 24 अक्टूबर, 1962 को भारत-चीन सीमा पर चीनी आक्रमण के मद्देनजर की गई थी। प्रत्‍येक वर्ष इस दिन को आईटीबीपी कर्मियों का मनोबल बढ़ाने और उनकी वीरता तथा उपलब्धियों को याद करने के लिए बल के स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है। आईटीबीपी को शुरू में सीमावर्ती आसूचना, अवैध घुसपैठ और तस्करी रोकने तथा एक गुरिल्‍ला बल के रूप में भारत-तिब्‍बत सीमा के साथ-साथ सुरक्षा स्‍थापित करने के लिए गठित किया गया था। बल के विस्तार के परिणामस्वरूप, आईटीबीपी को समय-समय पर सीमा सुरक्षा ड्यूटी, आतंकवाद रोधी कार्य और आंतरिक सुरक्षा कार्यों के अलावा अन्य कार्य भी सौंपे जा रहे हैं।

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