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जल संकट के मद्देनजर ‘फसल पैटर्न’ में बदलाव जरूरी: सिब्बल

नयी दिल्ली (लोकसत्य)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने देश में बढते जल संकट के मद्देनजर ‘फसलों के पैटर्न’ यानी कौन सी फसल किस क्षेत्र में बोयी जाये उसमें बदलाव करने की जरूरत बतायी है।

सिब्बल ने गुरूवार को राज्यसभा में आम बजट पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि भारत को आने वाले समय में भारी जल संकट का सामना करना पड़ सकता है लेकिन बजट में इसके लिए कोई ठोस विजन नहीं है। देश में पेयजल का केवल 4 प्रतिशत हिस्सा है जबकि उसकी आबादी दुनिया की आबादी का 18 फीसदी है। देश में पेयजल का 68 प्रतिशत हिस्सा कृषि में खर्च हो जाता है और धान, गन्ने और कपास की खेती में सबसे अधिक पानी की खपत होती है। इन फसलों का निर्यात भी किया जाता है इस तरह एक अनुमान के अनुसार भारत अपने पेयजल में से 94 अरब घन मीटर पानी का निर्यात कर देता है।
उन्होंने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए सरकार की ओर से किसानों को सलाह दी जानी चाहिए कि वे फसलों के पैटर्न में बदलाव करें और धान तथा गन्ने की खेती केवल उन्हीं क्षेत्रों में की जानी चाहिए जहां बारिश बहुत अधिक होती है। इससे पेयजल की बचत होगी। पहले धान की खेती केवल पश्चिम उत्तर प्रदेश और दक्षिण भारत में ही की जाती थी क्योंकि वहां दबा कर बारिश होती थी। सरकार की हर घर नल जल योजना पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि इसके पीछे कोई सोच नहीं है क्योंकि देश में 78 प्रतिशत पानी भू- जल है और इसके स्रोत निरंतर सूखते जा रहे हैं। सरकार ने दो मंत्रालयों को मिलाकर एक मंत्रालय जल शक्ति बना दिया है और उसका बजट कम कर दिया है।
सिब्बल ने बजट को हकीकत से दूर बताते हुए कहा कि इसमें कोई सोच नहीं है केवल बड़े सपने दिखाये जा रहे हैं। उन्होंने कहा , “ इसमें केवल ट्रेलर दिख रहा है , मूवी नहीं दिख रही। ” उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था के चार इंजन होते हैं निजी निवेश, सार्वजनिक निवेश, आंतरिक खपत और बाह्य खपत। आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इनमें से तीन की हालत खस्ता है और चौथा इसके कगार पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि यदि ये इंजन दुरूस्त हों तो निवेश होगा जिससे रोजगार बढेंगे और उससे अर्थव्यवस्था में तेजी आयेगी लेकिन ऐसा है नहीं। बेरोजगारी की दर 6.1 फीसदी है। हम सब को मिलकर इस समस्या का समाधान करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार ढिंढोरा पीट रही है कि अर्थव्यवस्था 2025 तक 50 खरब डालर तक पहुंच जायेगी लेकिन देश की समृद्धि को प्रति व्यक्ति आय के तौर पर देखा जाता है। इस मानदंड पर भारत का दुनिया में 122 वां नम्बर है। देश में 80 करोड़ लोगों की आय प्रति माह दस हजार से कम है। इनकी आय कैसे बढायी जायेगी और यदि इनकी आय नहीं बढती है तो नये भारत का निर्माण कैसे होगा।
कांग्रेस नेता ने कहा कि बजट में यह दिखाया गया है कि केवल अमीर लोगों पर कर बढाया गया है लेकिन सरकार ने परोक्ष रूप से आम आदमी पर कर का बोझ बढा दिया है। अमीर लोगों पर कर से सरकार को केवल 3 हजार करोड रूपये मिलेंगे जबकि पेट्रोल-डीजल पर बढाये गये शुल्क से उसे हर वर्ष 18 हजार करोड़ रूपये मिलेंगे। सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था की तस्वीर बताने के लिए पेश किये गये आंकडों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि 108 अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि सरकार के आंकड़े गलत हैं।

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