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तो ये है सियासत! जदयू को बिहार में भाजपा से दोस्ती, बाहर राज्यों में दुश्मनी? चार राज्यों में नये दोस्तों की तलाश में नीतीश

पटना (बिहार)। सियासी खेल में कहते हैं न कि सब कुछ जायज माना जाता है । अब इसे जनता जो समझे? लेकिन यह सोलह आने सच है।

गौरतलब है कि नीतीश कुमार की पार्टी जदयू को अब बिहार छोड़कर बाहर के चार राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव लडऩे के लिए नए सियासी दोस्तों की तलाश है। बताया जा रहा है कि जदयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने झारखंड, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली विधानसभा चुनाव में सक्रिय भागीदारी का फैसला किया है।

दिलचस्प बाते यह है कि इसके पहले यह भी संभावना जतायी जा रही थी कि जदयू इन राज्यों में अकेले विधानसभा चुनाव लड़ेगा। लेकिन, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी ने मंगलवार को मीडिया के समक्ष इस बात को स्वीकारा है कि जदयू इन राज्यों में क्षेत्रीय दलों से तालमेल की संभावनाओं की तलाश करेगा। इस खबर को मीडिया ने काफी सुर्खियां बनाई है।

गौरतलब हे कि जदयू ने दिल्ली विधानसभा पर चर्चा के लिए अगले सप्ताह बैठक बुलाई है। जदयू नेता त्यागी ने आगे बताया है कि उक्त राज्यों में भाजपा के पास जदयू के लिए स्पेस नहीं है। लिहाजा, दूसरे दलों से तालमेल की गुंजाइश बैठाने की योजना है।

ऐसी संभावना जतायी जा रही है कि हरियाणा में जदयू की जननायक जनता पार्टी से दोस्ती हो सकती है। इसका गठन इंडियन नेशनल लोकदल से निकाले गए दुष्यंत चौटाला ने किया है। लोकसभा चुनाव में भले ही उन्हें कामयाबी नहीं मिली लेकिन, विधानसभा चुनाव को लेकर वे उत्साहित हैं।

जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पिछली दिल्ली यात्रा में दुष्यंत ने उनसे मुलाकात की थी। त्यागी के मुताबिक यह शिष्टाचार मुलाकात थी। इसमें चुनाव को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई। लेकिन, दुष्यंत से चुनावी दोस्ती संभव है। 

केसी त्यागी ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर के ग्राम पंचायतों के चुनाव में जदयू को ठीक-ठाक कामयाबी मिली। इससे पार्टी का उत्साह बढ़ा है। वहां जब कभी चुनाव हो, जदयू अपना उम्मीदवार देगा।

इसी तरह झारखंड में जदयू को बाबू लाल मरांडी की पार्टी झारखंड विकास मोर्चा में संभावनाएं दिख रही हैं। मरांडी और नीतीश कुमार के संबंध पहले से अच्छे हैं। भाजपा से जदयू के अलगाव के दिनों में मरांडी से दोस्ती की बातचीत भी चली थी।

मरांडी झारखंड के पहले मुख्यमंत्री हैं। उनकी सरकार जदयू के आठ विधायकों के समर्थन से ही बनी थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में मरांडी कांग्रेस की अगुआई वाले महागठबंधन के साथ लड़े थे। खराब अनुभव रहा। सो, विधानसभा चुनाव में जदयू से दोस्ती की गुंजाइश बनती है। 

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