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सुप्रीम कोर्ट का हलाला-बहुविवाह के खिलाफ दायर याचिका पर जल्द सुनवाई से इनकार

नई दिल्ली (लोकसत्य)। मुस्लिम समुदाय में हलाला और बहुविवाह प्रथा के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अगुआई वाली बेंच ने कहा कि हम सर्दियों की छुट्टियों के बाद मामले को देखेंगे। यह मामला सुप्रीम कोर्ट ने संविधान पीठ को भेज दिया है। वकील व भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने इस मामले की जल्द सुनवाई की मांग की थी। याचिका में हलाला और पॉलीगेमी (बहुविवाह) को रेप जैसा अपराध घोषित करने की मांग की गई है। बहुविवाह को संगीन अपराध घोषित करने की मांग की गई है। अगर मौजूदा मुस्लिम पर्सनल लॉ के प्रावधानों को देखें तो इनके मुताबिक अगर किसी मुस्लिम महिला का तलाक हो चुका है और वह उसी पति से दोबारा निकाह करना चाहती है, तो उसे पहले किसी और शख्स से शादी कर एक रात गुजारनी होती है। इसे निकाह हलाला कहते हैं।

भाजपा नेता और वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने बहुविवाह, निकाह हलाला, निकाह मुताह (शियाओं के बीच अस्थाई विवाह) और निकाह मिस्यार (सुन्नियों के बीच अल्पकालिक विवाह) की प्रथा को चुनौती देते हुए उनकी याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग करते हुए कहा है कि यह संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन करते हैं।  अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता का अधिकार देता है, अनुच्छेद 15 धर्म, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव को रोकता है और अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संरक्षण का अधिकार प्रदान करता है।

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