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केंद्रीय शिक्षा मंत्री Ramesh Pokhriyal ‘Nishank’ ने 46 ऑनलाइन अटल संकाय विकास कार्यक्रमों का किया उद्घाटन

नई दिल्ली (लोकसत्य)। केंद्रीय शिक्षा मंत्री Ramesh Pokhriyal ‘Nishank’ ने सोमवार को एक ऑनलाइन कार्यक्रम में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) और एआईसीटीई ट्रेनिंग एंड लर्निंग (अटल) अकादमी के 46 ऑनलाइन अटल फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्रामों का उद्घाटन किया।

डॉ निशंक ने कहा, “मुझे ख़ुशी है कि तकनीकी शिक्षा में गुणवत्ता सुधार को बढ़ावा देने के लिए अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद हमेशा तत्पर रहा है और फैकल्टी के समग्र विकास के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। पूरे देश में अटल अकादमी द्वारा स्वीकृत संस्थानों और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के फैकल्टी सदस्यों को प्रेरित करने और प्रशिक्षित करने के लिए यह एक अनूठी पहल है।”

उन्होनें बताया कि यह सभी फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम देश भर में आईआईटी, एनआईटी, आईआईआईटी, एनआईटीटीटीआर और कुछ अन्य संस्थानों द्वारा संचालित किये जाएंगे।

इस कार्यक्रम की सफलता पर डॉ निशंक ने कहा, “अटल अकादमी का वर्तमान आकार देखकर बेहद ख़ुशी हो रही है क्योंकि सितंबर 2019 में 11 अटल अकादमियों की घोषणा की गई थी। इस वर्ष लगभग 1000 से अधिक ऑनलाइन अटल अकादमी एफडीपी की योजना है और एक लाख प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। यह बेहद गर्व की बात है कि अटल अकादमी का नाम वर्ल्ड बुक रिकार्ड्स में शामिल किया जाएगा।”

उन्होनें कहा कि शिक्षा पर सीधा सीधा प्रभाव डालने वाली ऐसी किसी भी योजना से जुड़ना बेहद ख़ुशी की बात है। इसके अलावा उन्होनें नई शिक्षा नीति में शिक्षकों के प्रशिक्षण के प्रावधानों के बारे में भी सबको अवगत करवाया।

कोरोना महामारी के इस चुनौतीपूर्ण समय में एआईसीटीई से जुड़े शिक्षकों के कौशल में सुधार के लिए अब तक 499 ऑनलाइन एफडीपी आयोजित किए जा चुके हैं, जिसमें देश के उच्च तकनीकी शिक्षण संस्थानों के 70 हजार से ज्यादा शिक्षकों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है. गौरतलब है कि 1000 ऑनलाइन एफडीपी की योजना बनाई गई है, जिससे एक लाख प्रतिभागियों को लाभ होगा।

इस अवसर पर एआईसीटीई के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर अनिल सहस्रबुद्धे, उपाध्यक्ष प्रोफ़ेसर एम पी पूनिया, प्रोफ़ेसर राजीव कुमार, अटल अकादमी के अध्यक्ष डॉ रविंद्र कुमार सोनी, डॉ मनोज सोनी, डॉ गिरधारी लाल गर्ग, डॉ नरसिम्हा शर्मा, प्रोफ़ेसर अजित चतुर्वेदी, डॉ मनोज सिंह गौर, प्रोफ़ेसर राघवेंद्र तिवारी एवं अन्य शिक्षक उपस्थित थे।

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