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Narsingh Jayanti 2021: कौन हैं भगवान नृसिंह, क्यों की जाती है इनकी पूजा

नई दिल्ली (लोकसत्य)। पुराणों के अनुसार इस पावन दिवस को भक्त प्रह्लाद की रक्षा करने के लिए भगवान विष्णु ने नृसिंह रूप में अवतार धारण किया था। इसी वजह से यह दिन भगवान नृसिंह के जयंती रूप में बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है।नृसिंह जयंती व्रत वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को किया जाता है। इस वर्ष 25 मई 2021, मंगलवार को यह पर्व मनाया जाएगा। इस दिन भगवान श्री नृसिंह ने खंभे को चीरकर भक्त प्रह्लाद की रक्षार्थ अवतार लिया था। विष्णु भगवान की अराधना कठिन से कठिन परिस्थिति से निकालने, शत्रुओं का नाश और कार्यों में शुभ फल प्रदान करने वाली है।

कैसे करें पूजा
इस दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में सोकर उठें।
संपूर्ण घर की साफ-सफाई करें।
इसके बाद गंगा जल या गौमूत्र का छिड़काव कर पूरा घर पवित्र करें।

मंत्र
नृसिंह देवदेवेश तव जन्मदिने शुभे।
उपवासं करिष्यामि सर्वभोगविवर्जितः॥

पूजा के स्थान को गोबर से लीपकर तथा कलश में तांबा इत्यादि डालकर उसमें अष्टदल कमल बनाना चाहिए। अष्टदल कमल पर सिंह, भगवान नृसिंह तथा लक्ष्मीजी की मूर्ति स्थापित करना चाहिए। तत्पश्चात वेदमंत्रों से इनकी प्राण-प्रतिष्ठा कर षोडशोपचार से पूजन करना चाहिए। इस मंत्र के साथ दोपहर के समय क्रमशः तिल, गोमूत्र, मृत्तिका और आंवला मल कर पृथक-पृथक चार बार स्नान करें। इसके बाद शुद्ध जल से स्नान करना चाहिए।

कब लिया नरसिंघ अवतार
ब्रह्माजी से वरदान प्राप्‍त करने के बाद हिरण्यकश्यपु ने खुद ने को भगवान मान लिया। उसने अपनी प्रजा को भी यह आदेश द‍िया कि सब उसको ही भगवान मानेंगे और उसकी ही पूजा करेंगे। उसने यह भी घोषणा करवाई कि जो भी उसकी बात नहीं मानेगा उसे मृत्‍युदंड द‍िया जाएगा। हिरण्यकश्यपु की बात सबने तो मान ली लेकिन उसके पुत्र प्रहृलादजी ने नहीं मानी। वह श्रीहर‍ि के अनन्‍य भक्‍त थे। द‍िन-रात उन्‍हीं की भक्ति मे लीन रहते थे। हिरण्यकश्यपु ने कई बार उसे समझाने का प्रयास किया। लेकिन जब वह नहीं माने तो उन्‍हें मारने का प्रयास किया।

क्या करें
रात्रि में गायन, वादन, पुराण श्रवण या हरि संकीर्तन से जागरण करें। दूसरे दिन फिर पूजन कर ब्राह्मणों को भोजन कराएं।
इस दिन व्रती को दिनभर उपवास रहना चाहिए।
सामर्थ्य अनुसार भू, गौ, तिल, स्वर्ण तथा वस्त्रादि का दान देना चाहिए
क्रोध, लोभ, मोह, झूठ, कुसंग तथा पापाचार का त्याग करना चाहिए।
इस दिन व्रती को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।

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