उत्तराखंड

आइजेयू के नौवें वार्षिक अधिवेशन में योग गुरू बाबा रामदेव ने देशभर के पत्रकारों को दिया संदेश

हरिद्वार (लोकसत्य)। योग गुरु स्वामी रामदेव ने पत्रकारों को आह्वान किया है कि वह मुकाबले के इस दौर में खुद प्रमाणित करने के लिए अपडेट रखें और ज्यादा से ज्यादा अध्ययन की आदत डालें। आने वाला समय बेहद मुकाबले का दौर है ऐसे में मार्किट में बने रहने के लिए पत्रकारों को एक शब्दकोश की तरह काम करना होगा। स्वामी रामदेव शुक्रवार को पतंजलि योगपीठ के श्रद्धालयंम सभागार में इंडियन जर्नलिस्ट्स यूनियन के नौवें वार्षिक राष्ट्रीय अधिवेशन का दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन करने के बाद देश के विभिन्न राज्योँ से आये हुए पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे।
आईजेयू के वार्षिक अधिवेशन के दौरान हरियाणा पत्रकार संघ के अध्यक्ष के बी पंडित को सर्वसम्मति से आईजेयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा कर्नाटक के मुरगेश शिवपुजी को महासचिव चुना गया जिसकी घोषणा आचार्य गौरी शंकर ने की।
स्वामी रामदेव ने केबी पंडित व मुरगेश तथा उनकी टीम को बधाई देते हुए कहा कि अगर आप स्वभाव से पत्रकार है तो आपके कई तरह के सामाजिक सुखों से वंचित होना पड़ता है।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार वेद प्रताप वैदिक ने कार्यपालिका, न्यायपालिका ओर विधानपालिका भले ही अपने रास्ते से भटक जाए लेकिन अगर कलम पालिका तटस्थ रहेगी तो लोकतंत्र को कोई खतरा नहीं।
क्योकि विधायक, सांसद और जनप्रतिनिधियों से अधिक जिमेदारी पत्रकार की है। इस अवसर पर बोलते हुए वरिष्ठ पत्रकार पवन बंसल ने हरियाणा अथवा देश के राजनीतिक हालातों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि लोकतंत्र में जब किसी एक दल को प्रचंड बहुमत मिलता है और विपक्ष गौण हो जाता है तो मीडिया की जिम्मेदारी ओर बढ़ जाती है क्योंकि विपक्ष के बगैर शासक निरंकुश हो जाता है। ऐसे में सत्ता को आइना दिखाने की जिमेदारी मीडिया की है।
आइजेयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के बी पंडित ने यूनियन द्वारा किये गए कार्यों पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि यूनियन द्वारा वर्किंग जर्नलिस्ट ऐक्ट में संशोधन, देश के सभी राज्यो में सरकारों के माध्यम से पेंशन योजना को लागू करवाने के लिए संघर्ष किया जाएगा।
इस अवसर आइजेयू की उत्तराखंड शाखा के अध्यक्ष अनंत मित्तल ने इन आयोजन के लिए पतंजलि प्रबंधन तथा स्वामी रामदेव का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर श्री गंगासभा के अध्यक्ष प्रदीप झा व तमन्य वशिष्ठ के अलावा कई बुद्धिजीवयो ने अपने विचार व्यक्त किये।

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