उत्तराखंड

पर्यावरणीय विषयों पर हुई विस्तारपूर्वक चर्चा

ऋषिकेश ( उत्तराखंड) । परमार्थ निकेतन के गंगा तट पर राष्ट्र, पर्यावरण एवं जल संरक्षण, गंगा सहित देश की सभी नदियों को समर्पित मानस कथा में मंगलवार को धर्मगुरूओं, पर्यावरणविदों एव विशिष्ट अतिथियों ने सहभाग किया।
इस मौके पर परमार्थ निकेतन परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती के अलावा ऊर्जा संसाधन संस्थान (टेरी ) के पूर्व प्रमुख, नोबल पुरस्कार विजेता और पर्यावरणविद् डाॅ आर के पचोरी, आर्चबिशप डाॅ अनिल कुट्टु , योग शक्तिपीठ दिल्ली से स्वामी योगीराज रामजीदास (रसायनी बाबा), जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती एवं अन्य पर्यावरणविदों ने जलवायु परिवर्तन, गंगा स्वच्छता, ग्लोबल वार्मिग, वायु और जल प्रदूषण जैसे अनेक पर्यावरणीय विषयों पर चर्चा की।
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने कहा कि ’’मनुष्य के जीवन में धर्म प्राणवायु आॅक्सीजन की तरह है। जैसे आॅक्सीजन के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती वैसे ही धर्म के बिना भी जीवन असम्भव है । अतः व्यक्ति का जीवन धर्ममय बने।

उन्होने कहा कि परोपकार सबसे बड़ा पुण्य है तथा दूसरों को पीड़ा पहुंचाना सबसे बड़ा पाप है। जो कार्य हमारी आत्मा को पतन की ओर ले जाये वही पाप है।’’ पर्यावरणविद् डाॅ आर के पचौरी ने कहा कि इस धरती पर अगर कोई समस्या है, जिसे हल करना सबसे ज्यादा जरूरी है तो वह है जलवायु परिवर्तन । मैं इस पर 20 वर्षो से कार्य कर रहा हूँ, परन्तु यह बहुत दुःख की बात है कि विज्ञान की इतनी तरक्की करने के बाद भी कुछ लोग इस मोह में रहते हैं कि हम आपना फायदा देखें।

आर्चबिशप डाॅ अनिल कुट्टु ने कहा कि सच्ची धार्मिकता यही है कि हम अपने लिये बटोरने की कोशिश न करे, बल्कि दूसरों को देने की कोशिश करें। उन्होने वाॅटर, सैनिटेशन और हाइजिन को मानव जीवन के लिये महत्वपूर्ण बताया। जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि आज पूरे विश्व को जिसकी सबसे अधिक आवश्यकता है वह है स्वच्छ जल और स्वच्छ प्राणवायु। इनके बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। अगर हमें विश्व स्तर पर शान्ति की स्थापना करनी है तो हम लोगों को पहले स्वच्छ जल और स्वच्छ वायु जैसी मौलिक जरूरतों को पूरा करने पर विचार करना होगा। इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने सभी विशिष्ट अतिथियों को पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट करते हुए जलवायु परिवर्तन हेतु मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Close