उत्तर प्रदेश

किसान जैविक खेती करें: शाही

मेरठ, लोकसत्य
सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी का शुभारंभ प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने फीता काटकर किया। उन्होंने कहा कि किसान पेस्टीसाइड व केमिकल का प्रयोग कम करें तथा प्राकृतिक व जैविक खेती करते हुए फसल चक्र अपनाएं। उन्होंने कहा कि उत्पादन बढ़ाना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि पौष्टिक उत्पादन हो, यह भी आवश्यक है। कृषि मंत्री ने कृषि उद्योग प्रदर्शनी में एक-एक स्टाल को जाकर देखा तथा जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर मंत्री ने गन्ना उत्पादन तकनीक पुस्तक व विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित कृषि दिग्दर्शिका का मेला विशेषांक नामक पुस्तक का विमोचन किया।
कृषि मंत्री पिछले वर्ष भी कृषि मेले में आये थे। उन्होंने कहा कि नये अनुसंधान जो कृषि क्षेत्र में आ रहे हैं इनको किसानों तक पहुंचना चाहिए, इसके लिए यह प्रदर्शनी व सम्मेलन आयोजित किये जाते हैं। उन्होंने कहा कि हमें हरियाणा की बराबरी या उससे ऊपर आना है। उप्र में गेहूं उत्पादन में मेरठ प्रथम व बागपत द्वितीय स्थान पर है। उन्होंने कहा गत दिनों लखनऊ में कृषि कुम्भ का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। वहीं पर हमने किसानों को 80 प्रतिशत अनुदान पर कृषि यंत्र देने की घोषणा की जिसका काफी सकारात्मक परिणाम सामने आया। उन्होंने कहा कि गत वर्षों की तुलना में पराली जलाने की घटनाएं उप्र में कम हुई हैं।
उन्होंने कहा किसान पाठशाला के आयोजन से किसानों को फायदा हुआ है, जिसके कारण किसानों को जानकारी प्राप्त हुई और सरकार ने 27 लाख किसानों को कृषि संबंधी विभिन्न योजनान्तर्गत 550 करोड का भुगतान किया, जो कि पूर्व में 110 करोड़ था। उन्होंने बताया कि उप्र में करीब 20 कृषि विज्ञान केन्द्र है, जिसमें से 07 नये खोले गये हैं। उन्होंने बताया कि सरदार पटेल कृषि विश्वविद्यालय मेरठ के लिए मेरठ भाजपा शासनकाल में राजनाथ सिंह के प्रयासों से बनी, जिसके लिए 36 करोड़ 77 लाख 76 हजार रु. दिये गये। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के लिए 71 शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया उन्होंने प्रारम्भ कराई तथा विश्वविद्यालय में पालीक्लीनिक भी प्रारंभ कराया गया, जिसमें पशुओं की हर बीमारी का इलाज संभव है। उन्होंने बताया कि सरकार ने पशुपालकों के बीमा कराने का निर्णय लिया व केसीसी उपलब्ध कराया। उन्होंने कहा कि सरकार ने पोस्ट हार्वेस्ट टैक्नोलोजी शुरू की तथा विश्वविद्यालय में इसे प्रारम्भ कराया जिससे फसल अवशेषों का उपयोग खेती में हो सके।
उन्होंने उप कृषि निदेषक को निर्देशित किया कि हर ब्लाक से एक बस में किसानों को कृषि मेले तक लाया जाये ताकि वह मेले का लाभ ले सके। मंत्री को कुलपति ने शाल व प्रतीक चिन्ह भेंट किया। इस अवसर पर राष्ट्रगान भी हुआ।
भाजपा के जिलाध्यक्ष रविन्द्र भडाना ने कहा कि प्रधानमंत्री ने किसानों की आय दुगुनी करने का संकल्प लिया है, जिसके लिए केन्द्र व प्रदेश सरकार द्वारा अनेको लाभकारी योजनाएं किसानों के हितार्थ चलायी जा रही है। उन्होंने कहा कि गन्ने में 38 नंबर का बीज सरकार के प्रयास से आया। इससे पूर्व एक बीघा में करीब 40 से 50 कुंतल गन्ना उत्पादन होता था। 38 नंबर का बीज आने से यह उत्पादन 75 से 85 कुंतल प्रति बीघा आंका गया है। उन्होंने कहा कि कृषि मेले मंे किसानों की संख्या को बढाया जाये तथा इसका व्यापक प्रचार प्रसार विश्वविद्यालय स्तर से किया जाये। उन्होंने कहा कि सरकार ने दलाली प्रथा को समाप्त किया है तथा अब किसान अपनी गन्ना पर्चीयों से आसानी से मिलों को गन्ना दे रहे है। कुलपति डा. आरके मित्तल ने कहा कि भारत में 700 से ज्यादा कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके) है। उन्होंने कहा कि हम कृषि प्रसार व खाद्य एवं पुष्टाहार की सुरक्षा की ओर बढ रहे है। हमें यहीं नहीं रूकना है और आगे जाना है। नेशनल ब्यूरो स्वायल सांइस व लैण्ड यूज प्लानिंग के निदेशक एसके सिंह ने कहा कि उन्होंने उ0प्र0 की आरगेनिक कार्बन मैपिंग किया। उ0प्र0 में यह येलो लाईन पर है , जो कि ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि आरगेनिक कार्बन कम हो रहा है यह अच्छा संकेत नहीं है। उप महानिदेशक कृषि प्रसार भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली डा. एके सिंह ने कहा कि गत तीन बार से हर वर्ष इस मेले में आते है। उन्होंने कहा कि खेती में बदलाव लाना होगा तथा इसकी पहल स्वयं किसानों को ही करनी होगी। उन्होंने कहा कि टिकाऊ खेती आज की आवश्ककता है। इस अवसर पर विधायक किठौर सत्यवीर त्यागी, संजय त्यागी, डा. सचान, उप कृषि निदेशक ब्रजेश सिंह तथा किसान आदि उपस्थित रहे।

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