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नहीं मिलेगी पावर कट से राहत, न ही मिलेगा हर्जाना

नई दिल्ली, लोकसत्य। दिल्लीवालों को इस भीषण गर्मी और धूप में न तो पावर कट से राहत मिल सकती है और न ही बिजली कंपनियां उन्हें कोई हर्जाना देनेवाली हैं। दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेग्युलेटरी कमिशन (डीईआरसी) ने पिछले साल दिसंबर में जो हर्जाना पॉलिसी लागू की थी, उस पर हाई कोर्ट ने स्टे लगा दिया है।
यही कारण है कि पिछले कुछ दिनों से पावर डिमांड में बढ़ोतरी के बाद बिजली कटौती बेहिसाब है और पावर वितरण कंपनियां बेफिक्र हैं। डीईआरसी ने उपभोक्ताओं की राहत के लिए फिर से अपील की है। डीईआरसी के चेयरमैन सत्येंद्र सिंह चौहान का कहना है कि पॉलिसी पर फैसले का इंतजार किया जा रहा है।
गर्मियों के दौरान दिल्ली में बेहिसाब पावर कट पर रोक लगाने के लिए डीईआरसी ने पिछले साल हर्जाना पॉलिसी लागू की थी। पॉलिसी की माने तो 1 घंटे से अधिक पावर कट पर हर 50 रुपये/घंटा और 2 घंटे से अधिक पावर कट पर 100 रुपये/ घंटे के हिसाब से बिजली वितरण कंपनियों को जुर्माना देना था। नई पॉलिसी लागू होते ही दिल्ली की सभी प्रमुख बिजली वितरण कंपनियों की समस्या बढ़ गई थी। बाहरी दिल्ली में बिजली सप्लाई करने वाली टाटा पावर डीडीएल ने इस पॉलिसी के विरोध में हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने फरवरी में पॉलिसी पर स्टे लगा दी। इसलिए पावर कट को लेकर दिल्ली में बिजली वितरण कंपनियां बेफिक्र हैं। अब उन्हें अधिक देर तक पावर कट होने से जुर्माने का कोई डर नहीं।
डीईआरसी चेयरमैन सत्येंद्र सिंह चौहान का कहना है कि कमिशन ने जो ऑटोमेटिक पावर कट कंपनसेशन की पॉलिसी बनाई थी, उस पर हाई कोर्ट ने स्टे लगा दिया है। इसलिए कमिशन बिजली वितरण कंपनियों के खिलाफ कोई कारगर फैसला ले नहीं पा रहा है। कंपनसेशन की पुरानी पॉलिसी को ही रिवाइज कर नई पॉलिसी बनाई गई थी और इस पॉलिसी पर स्टे है। इसलिए अब कमिशन पुरानी पॉलिसी के आधार पर भी इन कंपनियों के खिलाफ कोई उचित कदम उठाने में असमर्थ है। अब केवल हाई कोर्ट के फैसले का इंतजार किया जा रहा है। हालांकि, पॉलिसी पर स्टे के फैसले को कमिशन ने हाई कोर्ट में चैलेंज किया है।

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