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केजरीवाल सरकार ने की कॉलेजों के फंड में कटौती, सड़क पर उतरे शिक्षक

नयी दिल्ली, (लोकसत्य)। नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (एनडीटीएफ) की ओर से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सरकारी आवास पर 28 कालेजों में फ़ंड कटौती और अन्य समस्याओं को लेकर प्रदर्शन किया। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने भी धरने को संबोधित किया। उन्होने कहा कि दिल्ली सरकार के फंड कटौती से 28 कॉलेजों के कामकाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा हैं। आगे उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार अपने घोषणा पत्र के अनुसार 20 नए कॉलेज खोलने में असफल रही है। दिल्ली सरकार के बाहरी दिल्ली व अन्य कई कॉलेजों में बुनियादी ढांचे का अभाव है। डीयू की एग्जीक्यूटिव काउंसिल के पूर्व सदस्य डॉ. अजय भागी ने कहा कि दिल्ली सरकार की शह पर इन कॉलेजों में दिल्ली सरकार द्वारा मनोनीत प्रबंधन समितियों के सदस्यों ने पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित होकर व्यवहार किया है। इनके मनोनीत सदस्यों ने कॉलेजों की दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों और कामकाज में सीधा हस्तक्षेप किया है जो डीयू के मानदंडों का उल्लंघन है। विश्वविद्यालय के नियमों की अवहेलना करके एडहॉक शिक्षकों की नियुक्ति के चयन बोर्ड में बैठते थे। विवेकानंद कॉलेज में प्रबंधन समिति ने इस मुद्दे पर विश्वविद्यालय/कार्यकारी परिषद की सिफारिशों की अनदेखी कर शिक्षकों के लिए उपस्थिति प्रणाली लागू किया है।

उन्होने बताया कि कई कॉलेजों में इन्फ्रास्ट्रक्चर को तत्काल मरम्मत,और नवीनीकरण की आवश्यकता है और इसके लिए दिल्ली सरकार से सहायता की आवश्यकता होती है। ओबीसी विस्तार, ईडब्लूएस विस्तार, सीबीसीएस पाठ्यक्रम और यूजीसी के 14/16 कार्यभार मानदंडों के कार्यान्वयन से शिक्षण और गैर-शिक्षण पदों की आवश्यकता बढ़ गई है। लेकिन इस तरह की गंभीर चिंताओं पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। 7वें  वेतनमान के अनुसार इन कॉलेजों में अब तक वांछित वित्तीय सहायता नहीं होने के कारण शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए एचआरए  के एरियर का भुगतान नहीं किया गया है।

धरने के बाद एनडीटीएफ प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली सरकार को अपनी मांगों का ज्ञापन भी सौंपा। धरने में डॉ इंद्र मोहन कपाही, डॉ राकेश पांडे,  वी एस नेगी, वीरेंद्र भारद्वाज, सलोनी गुप्ता, सुनील शर्मा, बिजेंद्र कुमार, चमन सिंह, आर एन दुबे, शंभू नाथ दुबे, संध्या आदि ने भाग लिया। एनडीटीएफ को उम्मीद है कि सरकार इन मांगों पर ध्यान देगी।  अन्यथा  एनडीटीएफ दिल्ली सरकार के खिलाफ विरोध को बढ़ाने में संकोच नहीं करेगा। 

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