गुजरातराज्य

सरदार सरोवर नर्मदा बांध 97 प्रतिशत से अधिक भरा

वडोदरा,(लोकसत्य)। नर्मदा परियोजना को लेकर गुजरात तथा मध्य प्रदेश के बीच नये सिरे से जारी घमासान के बीच इस पडोसी राज्य में नर्मदा नदी के जलग्रहण क्षेत्र में वर्षा के कारण पानी की सतत भारी आवक के कारण मध्य गुजरात के केवड़िया में बने सरदार सरोवर बांध जलाशय का जलस्तर रोज ऊंचाई के नये रिकार्ड बना रहा है और अब यह ओवरफ्लो यानी उच्चतम स्तर से एक मीटर से कम दूरी पर पहुंच गया है।
इसमें पानी का कुल संग्रह भी 97 प्रतिशत से अधिक हो गया है।
आज शाम छह बजे इसका जलस्तर 137.93 मीटर था जबकि अधिकतम स्तर 138.68 मीटर है।
मध्य प्रदेश के नर्मदा घाटी विभाग के मंत्री हनी बघेल ने आरोप लगाया है कि गुजरात परियोजना संबंधी समझौते का अनुपालन नहीं कर रहा है। इसने अब तक पुनर्वास का पूरा मुआवजा भी नहीं दिया और सरदार सरोवर डैम में जलस्तर बढ़ने से कई स्थानों पर डूब का खतरा पैदा हो गया है।
उधर गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने इसे खारिज करते हुए कहा कि गुजरात सभी नियमों का पालन कर रहा है और इसने पुनर्वास के लिए 500 करोड़ रूपये से भी अधिक की राशि मप्र को दी है। अगर यह मप्र से हो रही पानी की भारी आवक को बांध के जरिये नियंत्रित नहीं करेगा तो भरूच तथा अन्य स्थानों में नदी किनारे के निचले इलाकों में भारी तबाही हो जायेगी।
इससे पहले गत 11 सितंबर को पहली बार जलस्तर 137 मी, आठ सितंबर को 136 मी, दो सितंबर को 135 मीटर पर 27 अगस्त को जलस्तर 134 मी पर और 20 अगस्त को 133 मी पर पहुंचा था।
दो साल पहले यानी 2017 में इस पर लगाये गये 30 दरवाजों को बंद किये जाने के बाद से इसका अधिकतम स्तर पूर्व के 121.92 मीटर से बढ़ कर 138.68 मी हो गया है।
नर्मदा बाढ़ नियंत्रण कक्ष ने यूएनआई को बताया कि आज शाम छह बजे इसका जलस्तर 137.93 मीटर था जो बाद में सात बजे तक घट कर 137.91 मीटर हो गया। पानी की आवक 642797 घन फुट प्रति सेकंड या क्यूसेक तथा जावक 703044 क्यूसेक थी। 23 दरवाजों को खोल दिया गया था। इसमें कुल जल संग्रह 9213 मिलीयन घन मीटर यानी एमसीएम था जो 97 प्रतिशत से भी अधिक था।
इस पर लगे दरवाजों को पहली बार गत 9 अगस्त को खोला गया था जब जलस्तर 131.45 मीटर तक पहुंचा था। यह दरवाजे लगाये जाने से गुजरात की जीवनरेखा कहे जाने वाले इस जलाशय का उच्चतम जलस्तर 121.92 मीटर से बढ़ कर 138.68 मी. हो गया था। इससे पहले के दो वर्ष में इसमें अधिकतम जलस्तर 130.75 मी. दर्ज किया गया था जो 25 सितंबर 2017 को पहुंचा था।
दो साल बाद नदी में स्थित जल विद्युत संयंत्र की सभी 6 इकाइयों (प्रत्येक 200 मेगावाट) को शुरू कर दिया गया था जो आज भी जारी है। इसकी मुख्य नहर से जुड़ी जल विद्युत इकाई (प्रत्येक 50 मेगावाट) की पांच में से चार इकाई भी शुरू की गयी है। पानी का कुल संग्रह लगभग 93 प्रतिशत से अधिक हो गया है। पानी के भारी प्रवाह के कारण नदी के नीचे के प्रवाह वाले इलाकों अलर्ट जारी किया गया है। भरूच और नर्मदा जिले के नदी किनारे वाले कई गांवों में पानी घुस गया है जबकि सैकड़ो लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भी पहुंचाया गया है।
इस जलाशय के जरिये 167 शहरों और 10 हजार से अधिक गांवों में रहने वाली राज्य की आधी से अधिक आबादी को जलापूर्ति की जाती है।

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