उत्तर प्रदेश

अधिग्रहण बाद भूमि खरीदने वाले को मुआवजा पाने का अधिकार नहीं: High Court

प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी होते ही जमीन सरकार की हो जाती है लिहाजा अधिगृहीत भूमि खरीदने या बेचने का किसी को अधिकार नहीं है। ऐसे मे अधिगृहीत भूमि खरीदने वाले को मुआवजा पाने का भी अधिकार नही है।

कोर्ट ने इस तर्क को नही माना कि याचिका में अधिग्रहण को चुनौती नही दी गयी है। केवल मुआवजे की मांग की गयी है। जमीन खरीदने वाले को मुआवजा पाने का अधिकार है। कोर्ट ने उच्चतम न्यायालय के विपिन अग्रवाल केस में स्थापित विधि सिद्धांत को अपनाते हुए मुआवजा दिलाने की मांग में दाखिल याचिका खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति एम एन भंडारी तथा न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने अजय कुमार श्रीवास्तव की याचिका पर दिया है।

याचिका पर अधिवक्ता सत्येन्द्र नाथ श्रीवास्तव व भारत सरकार के अधिवक्ता गौरव कुमार चंद ने बहस की। राष्ट्रीय राजमार्ग चौड़ीकरण के लिए जमीन अधिगृहीत की गयी।अधिग्रहण की अधिसूचना जारी कर दी गयी ।इसके बाद भूमि स्वामी से याची ने बैनामा करा लिया और मुआवजे के लिए आवेदन किया और कहा कि उसने जमीन खरीद ली है। इसलिए मुआवजा उसे ही दिया जाय। एडीएम गाजीपुर ने पिछले साल 7 दिसम्बर को यह कहते हुए अर्जी खारिज कर दी कि अधिग्रहण के बाद सरकार की जमीन की विक्री खरीद मान्य नही है। जिसे याचिका में चुनौती दी गयी थी।

Tags
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Close