दिल्लीराज्य

मादक पदार्थ व मानव तस्करी उन्मूलन पर Webnar का आयोजन

नई दिल्ली,(लोकसत्य)। Delhi राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण भागीदारी जन सहयोग समिति एवं मंडलीय शिक्षा एवं प्रक्षिक्षण संस्थान कड़कड़डूमा के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय सेवा योजना गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, तथा दिल्ली की मोती बाग, दरियागंज,केशवपुरम एवं कड़कड़डूमा चार डाइट की सहभागिता के साथ वर्ल्ड डे अंगेस्ट ड्रग एब्यूज एंड ट्राफिकिंग के अवसर पर एक वेबिनार का आयोजन डाइट कड़कड़डूमा में किया गया।

कार्यक्रम में डॉ शिवानी गोस्वामी ने अपने विचार रखतें हुए बताया कि मादक पदार्थो का सेवन और मानव तस्करी भारत में बहुत तेजी से बढ़ रहीं हैं ,उन्होंने इन बुराइयों को बढ़ने और इनके प्रभाव की चर्चा विस्तार पूर्वक की ,उन्होंने इस समस्याओं के समाधान पर चर्चा की।

माननीय जज  हरजीत सिंह ने इन समस्याओं के कानूनी पहलुओं की जानकारी देते हुए NDPS एक्ट 1985 के कानूनी पहलुओं विस्तार पूर्वक बताया ,उन्होंने बताया कि ड्रग्स की सज़ा में मानवीय आधार पर सजा का प्रावधान हैं ,यदि कोई नशे का शिकार हैं तो उस पर मुकदमा नहीं चलाया जाता बल्कि उसे सरकारी उन्मूलन संस्था भेजा जाता हैं ,उन्होंने बताया कि सज़ा के प्रावधानों में ड्रग्स की  मात्रा की भूमिका के बारे में बताया,उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 47 का उल्लेख करतें हुए की सरकार ऐसे कानून बनाएं जिससे इन बुराइयों को समाज में रोका जा सकें ।

उन्होंने इस संबंध में राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1800110031 को सभी के लिए साझा किया ,उन्होंने मानव तस्करी के बारें में कहा कि मानव को बेचना ,खरीदना या उसकी इच्छा के विरुद्ध कार्य करवाने के अलावा कम उम्र के बच्चों से घर पर या फैक्टरी में काम करवाना भी मानव तस्करी का एक रूप है ।

दिल्ली बाल सरंक्षण आयोग की सदस्या ज्योति राठी ने कहा कि मादक पदार्थो एवं मानव तस्करी की रोकथाम के लिए ये आवश्यक हैं कि बच्चो के साथ किसी भी तरह के अधिकार से वंचित होने पर आयोग संज्ञान ले सकता हैं ,उन्होंने बताया कि मेरी आवाज एप्प इस संदर्भ में सभी की सहायता कर सकता हैं जिसे 2019 में लांच किया गया था ,बच्चों के साथ सेक्सुअल एब्यूज आइसोलेटेड स्थान पर दिन में किया जाता हैं ,इसलिए हमें ज्यादा सतर्क रहने की आवश्यकता है,अभिवावकों और शिक्षकों का बच्चों को बचाने का नैतिक जिम्मेदारी हैं और इसलिए उनके साथ हुई सेक्सुअल एब्यूज पर संज्ञान लेना बहुत आवश्यक हैं ,कोई भी इससे अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता। ,

उन्होंने आंकड़े प्रस्तुत करतें हुए उन्होंने कहा कि 2008 से 2018 में सेक्सुअल एब्यूज के मामलों में 18% की वृद्धि हुई हैं ,उन्होंने चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 साझा किया और कहा इस पर किसी भी बच्चें के साथ घटित सेक्सुअल एब्यूज की जानकारी दे सकते हैं ,उन्होंने अपने वक्तव्य में बताया कि बच्चों के साथ दुष्कर्म में जानने वाले 80% होते हैं ,इसलिए हमें सभी को जागरूक करना है और बचपन को खुशहाल बनाना हैं ।

डॉ सजीला मैनी ने अपने वक्तव्य में भारत को नशा मुक्त बनाने का संकल्प लेते हुए बताया कि किसी भी प्रकार का नशा जीवन को बरबाद कर सकता हैं, वह अपने जीवन का आनंद नहीं उठा सकता ,उन्होंने अपने व्यक्तव मे बताया कि नशे के कौन से प्रकार हैं ,उसके चरण क्या हैं और नशा कैसे मृत्यु का कारण बन सकता हैं ,सबसे पहले नशा हमारे कॉग्निटिव फंक्शन को नुकसान करता है और नशे से व्यक्ति नपुंसक हो सकता हैं ,उन्होंने कहा कि लंगस सबसे पहले प्रभावित होते हैं ,फिर हमारा रेस्पिरेटरी सिस्टम ,इम्यून सिस्टम और व्यक्ति किसी भी रोग से आसानी से घिर कर बर्बाद हो जाता हैं ।

इस कार्यक्रम के अंत मे डाइट कड़कड़डूमा के प्रवक्ता  प्रवीण कुमार ने संस्थान के प्राचार्य  सोहराब आलम ,विजय गौर जनरल सेक्रेटरी जनभागीदारी,आमंत्रित सभी वक्ताओं कार्यक्रम समन्वयक डॉ कोशिका पुष्कर रावत ,तकनीकी समन्यवक एम .के .जायला , संस्थान के सभी संकाय सदस्यों और इस कार्यक्रम में उपस्थित सभी विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया ।

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