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करतारपुर गलियारे पर भारत-पाक में जुबानी जंग जारी

इस्लामाबाद (लोकसत्य)। सिख धर्म के संस्थापक गुरू नानक देव के 550वें प्रकाशोत्सव के मौके पर भारत और पाकिस्तान के बीच नवनिर्मित करतारपुर गलियारे के उद्घाटन की पूर्व संध्या पर भी दोनों देशों के बीच जुबानी जंग जारी रही।
पाकिस्तान ने इस मौके पर करतारपुर गलियारे का दौरा करने वाले सिख श्रद्धालुओं के लिए प्रधानमंत्री इमरान खान की ओर से दिये गये ‘रियायतों’ को ठुकराने के नरेंद्र माेदी सरकार के निर्णय पर खेद जताया है।
पाकिस्तान के विदेश विभाग के प्रवक्ता मुहम्मद फैसल ने कहा, “एक विशेष प्रोत्साहन के रूप में, पाकिस्तान ने तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए बाबा गुरु नानक की 550वीं जयंती के शुभ अवसर पर रियायतों की घोषणा की। लेकिन सिख भावनाओं की घोर उपेक्षा करते हुए भारत ने इसे साफ ठुकरा दिया है।” उन्होंने कहा, “अगर भारत तीर्थयात्रियों के लिए इन सुविधाजनक उपायों का लाभ नहीं उठाना चाहता है, तो यह भारत की पसंद है।”
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया भारतीय विदेश मंत्रालय के उस कथन के बाद आई जिसमें कहा गया कि नव स्थापित गलियारे के माध्यम से करतारपुर गुरुद्वारे के लिए सिख तीर्थयात्रियों की यात्रा गलियारे के संचालन को नियंत्रित करने वाले द्विपक्षीय समझौते के अनुसार आयोजित की जाएगी।
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने इससे पहले कहा, “पाकिस्तान से विरोधाभासी रिपोर्टें आ रहीं हैं।”
कुमार की यह टिप्पणी पाकिस्तान की सेना के बयान के बाद आयी है जिसमें सेना के प्रवक्ता ने कहा कि करतारपुर आने वाले भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए वीजा जरूरी होगा। इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने ट्वीट करके घोषणा की थी कि उद्घाटन के मौके पर नौ से 12 नवंबर के बीच तीर्थयात्रियों को पासपोर्ट की जरूरत नहीं होगी।

वास्तविक स्थिति पूछे जाने पर कुमार ने कहा कि दोनों देशों के बीच एक करार पर दस्तखत किये गये हैं और उसमें पासपोर्ट की अनिवार्यता लिखी है। वास्तविकता में यात्रा का यह नियम तब तक लागू होगा जब तक कि समझौते के संशोधित स्वरूप पर दस्तखत ना हो जाएं। पाकिस्तान या भारत को समझौते में एकतरफा बदलाव करने या घोषणा करने का कोई हक नहीं है।

डॉ फैसल ने अपने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा था कि पाकिस्तान सरकार ने विशेष रियायत देते हुए पासपोर्ट की आवश्यकता और तीर्थयात्रियों के तीर्थयात्रा से 10 दिन की अग्रिम सूचना देने की अनिवार्यता को माफ कर दिया था। इसके अलावा, प्रति तीर्थयात्रियों के लिए 20 डॉलर सेवा शुल्क भी 9 से 12 नवंबर के बीच तक माफ किए गए थे।


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